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सेक्टर संवाद: अपनी ही इकाइयों में जाने से डरते हैं उद्यमी

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अमर उजाला सेक्टर संवाद:
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हेडिंग: अपनी ही इकाइयों में जाने से डरते हैं उद्यमी
सबहेड: सेक्टर-63 में न सड़कें हैं न रास्ते खुले, कर्मचारियों ने भी आना किया बंद
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। औद्योगिक विकास के नाम पर हर साल करोड़ों रुपया खर्च किया जा रहा है, लेकिन औद्योगिक सेक्टर फिर भी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सेक्टर-63 के हालात नोएडा प्राधिकरण के दावों की पोल खोल रहे हैं। सेक्टर में न सड़कें हैं न औद्योगिक इकाइयों तक जाने के लिए रास्ते खुले हुए हैं। हालात इस कदर खराब हैं कि खुद उद्यमी ही अपनी इकाइयों में जाने से डरने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर विकास के नाम पर हर साल बड़ी रकम कहां खर्च हो रही है।
अमर उजाला सेक्टर संवाद अभियान के दौरान सेक्टर-63 के उद्यमियों में प्राधिकरण की कार्यशैली को लेकर काफी रोष नजर आया। उद्यमियों का कहना था कि जिस सेक्टर को औद्योगिक शहर नोएडा के रोल मॉडल के तौर पर विकसित किया जाना था, आज उसके हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि यहां नया उद्योग लगाने के लिए कोई सोचता तक नहीं है। जो उद्योग पहले से लगे हुए हैं वो भी असुविधाओं के कारण शहर छोड़ने पर विचार करने लगे हैं। एनईए अध्यक्ष विपिन मल्हन ने बताया कि सेक्टर में 10 ब्लॉक हैं, सभी ब्लॉकों में उद्योग प्रतिनिधियों से लेकर दो लाख श्रमिक रोजाना समस्याओं से जूझ रहे हैं। सबसे बुरा हाल डी ब्लॉक का है। मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण की वजह से कई उद्योग सेक्टर से कट गए हैं। पहले चंद कदम की दूरी तय कर उद्यमी अपनी इकाइयों में पहुंच जाते थे। अब छिजारसी गांव और एफएनजी से करीब एक किलोमीटर लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ता है। सात महीने से डी ब्लॉक की सड़क खोदकर डाली हुई है। दिनभर धूल-मिट्टी उड़ती है।
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कई कंपनियां बंदी के कगार पर
जिस शहर को यूपी का शो विंडो बताकर निवेशकों के सामने पेश किया जाता है, उसकी हकीकत सेक्टर-63 में आकर देखी जा सकती है। सेक्टर में सड़कें है ही नहीं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। डी ब्लॉक में जाने के लिए उद्यमियों-कर्मचारियों को रोजाना जान जोखिम में डालनी पड़ती है। स्थानीय उद्यमियों का कहना है कि इस ब्लॉक की कई कंपनियां बंदी के कगार पर पहुंच गई है। जिनके उद्योग हैं वो भी यहां आने से कतराने लगे हैं। रोजाना बढ़ रही मुसीबत से परेशान श्रमिकों ने भी आना बंद कर दिया है। वे भी दूसरी जगह रोजगार तलाश रहे हैं।
आखिर क्यों न बढ़े प्रदूषण
एनजीटी और ईपीसीए के नियमों को सख्ती से लागू करने के दावों में कितनी हकीकत है, ये देखना है तो सेक्टर-63 की तस्वीर देखी जा सकती है। एनसीआर में बढ़ रहा प्रदूषण को लेकर चिंताजनक हालात के बावजूद नोएडा प्राधिकरण खुद नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। सड़कें खुदी पड़ी हैं, धूल-मिट्टी उड़ने से लोग परेशान हैं। उद्यमियों का कहना है कि सात माह पहले सड़क को खोदकर डाल दिया गया था। लगातार इस समस्या को अधिकारियों के सामने उठाया जा रहा है, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।
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सेक्टर-63 में 1200 से ज्यादा छोटे-बड़े उद्योग लगे हैं। सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व और सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले इस सेक्टर की तस्वीर बाकाई चिंताजनक है। सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
- विपिन मल्हन, अध्यक्ष-एनईए
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मेट्रो कॉरिडोर और हाईवे चौड़ा करने के नाम पर औद्योगिक सेक्टर को बर्बाद कर दिया गया है। प्राधिकरण सेक्टर की समस्याओं पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा है। इससे नोएडा की साख पर बट्टा लगा रहा है।
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-शिव नंदन शर्मा, उद्यमी
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नोएडा के सेक्टर-63 के हालात जितने बुरे हैं, शायद ही किसी अन्य औद्योगिक सेक्टर में इतनी समस्याएं हैं। अतिक्रमण का जाल और सड़काें की बदहाली देखकर विदेशों से आने वाले बायर्स भी कतराने लगे हैं।
-रोहित मित्तल, उद्यमी
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