मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के दोषी नीलू की फांसी की सजा में 16 मजबूत साक्ष्य आधार बने। इन साक्ष्यों की वजह से ही मृतका के परिजनों को न्याय मिल सका। खास बात यह है कि अपर सत्र न्यायाधीश (विशेष जज पोक्सो एक्ट) कोर्ट ने ही डेढ़ वर्ष पहले पुत्री के साथ दुष्कर्म कर हत्या के मामले में दोषी पिता को फांसी की सजा सुनाई थी। अब नीलू को फांसी की सजा सुनाई है।
इमलिया सुल्तानपुर निवासी नीलू की सजा में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पंचायतनामा, फोटो, जहां से शव बरामद हुआ वहां का नक्शा, गिरफ्तारी के बाद दोषी के घर से बरामद मृतका की जूती, विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट समेत सभी 16 साक्ष्यों ने यह साबित किया कि पूरी घटना में नीलू संलिप्त रहा है। इसके साथ ही 12 गवाहों ने कोर्ट में बयान भी दिया, जिनमें विवेचक, पोस्टमार्टम करने वाले दो चिकित्सक, मृतका के परिजन भी शामिल हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व न्यायाधीश नरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने बताया कि डेढ़ वर्ष पहले पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश रहे राहुल प्रकाश ने रेउसा निवासी युवक को फांसी की सजा सुनाई थी। दोषी ने अपनी आठ साल की बेटी के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी थी। शव को दोषी ने एक टैंक में छिपा दिया था।
न्याय से संतुष्ट दिखे परिजन, छलके आंसू
नीलू को फांसी की सजा मिलने के बाद मासूम के परिजनों ने संतोष जाहिर किया। वह न्याय मिलने से संतुष्ट दिखे। फैसला सुनने के बाद उनके आंसू निकल आए। पिता ने बताया कि वह मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के बाद भी उनको न्याय मिला। उन्होंने बताया कि वह घटना वाले दिन भी मजदूरी करने गए थे। पत्नी कोटे पर राशन लेने गई थी। दोषी नीलू के परिवार में पत्नी व तीन बच्चे हैं। नीलू के बेटे ने पढ़ाई छोड़ दी है।