दिव्यांग आरक्षण पर एम्स
से दोबारा मांगा जवाब
- हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर दिया जवाब किया अस्वीकार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को फटकार लगाते हुए दिव्यांगों को मेडिकल कोर्स में आरक्षण के मुद्दे पर उसका जवाब बुधवार को अस्वीकार कर दिया। हाईकोर्ट ने संस्थान को दो सप्ताह के भीतर दोबारा जवाब दाखिल करने निर्देश दिया है। दिव्यांगों को सभी कोर्स में समान रूप से पांच फीसदी आरक्षण देने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट अब 31 जनवरी 2019 को सुनवाई करेगी।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष याची डॉक्टर दमनदीप सिंह की ओर से एम्स के जवाब का विरोध करते हुए वकील गौरव बंसल ने कहा कि एम्स दिव्यांगों को एमडी व एमएस कोर्स में पांच फीसदी आरक्षण देने में भेदभाव कर रहा है। याची का कहना है कि दिव्यांगों के लिए बने कानून के मुताबिक, उन्हें शिक्षा में पांच फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान है। एम्स इस संबंध में कानूनी व्यवस्था का पालन नहीं कर रहा है। यह रवैया दिव्यांगों के प्रति भेदभावपूर्ण है। इसलिए पांच फीसदी आरक्षण का नियम सख्ती से लागू कराया जाए। याची भी दिव्यांग है और खुद एम्स में डॉक्टर है। उसे इस आरक्षण का लाभ मिलेगा या नहीं, यह मुद्दा कोर्ट बाद में तय करेगी।