दिल्ली में दिव्यांगों के लिए कानून नहीं हुआ लागू : गुप्ता
कहा, बनाए गए नए कानून पर भी राजनीति कर रहे हैं सीएम केजरीवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस को लेकर सोमवार को नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज तक दिल्ली में संसद द्वारा पारित दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 लागू नहीं हुआ है। जाहिर है सीएम केजरीवाल दिव्यांगों के लिए बनाए नए कानून पर भी राजनीति कर रहे हैं।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सच्चाई यह है कि केजरीवाल सरकार ने दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए एक भी नई योजना अपने कार्यकाल में शुरू नहीं की। इस समय जितनी भी योजनाएं चल रही हैं वे सब पुरानी सरकारों द्वारा लागू की गई थीं। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार दिल्ली में 2,34,882 दिव्यांग हैं, लेकिन यह संख्या 6 वर्ष पूर्व विद्यमान केवल 7 श्रेणियों की है। यदि हम वर्तमान में सभी 21 श्रेणियों को सम्मिलित करें तो अनुमानत: दिव्यांगों की संख्या 50 लाख से भी ज्यादा हो सकती है।
दिल्ली में लाखों लोग रक्त की बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें थैलेसीमिया, हैमोफीलिया तथा सिकलसैल जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। सभी श्रेणियों को आरक्षण देने के लिए चार वर्ग में बांटा गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए एक प्रतिशत आरक्षण होगा। कानून में दिव्यांगजनों के खिलाफ भेदभाव करने और उनको जान-बूझकर अनदेखा करने पर पहली बार दंड और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसलिए नेता प्रपिक्ष ने सरकार से इस कानून को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है।
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एम्स के डॉक्टर बोले, दिव्यांगों को मिले अलग से व्यवस्था
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगता दिवस पर देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स के डॉक्टरों ने सोमवार को अस्पताल में दिव्यांग मरीजों के लिए अलग से व्यवस्था लागू करने की मांग की। इनका कहना है कि सरकार और एम्स प्रबंधन को इसे लेकर पहल करनी चाहिए। दिव्यांग मरीजों को अस्पतालों में उनके अधिकार मिलने चाहिए। एम्स के आरडीए के महासचिव डॉक्टर अरुण आशीष पांडे ने बताया कि कार्यक्रम में दिव्यांगजनों के लिए साल 2016 के अधिकार कानून पर चर्चा की गई। इसके बावजूद अब तक अमल नहीं हो सका है। एम्स के हॉस्टल की बात करें तो वहां आज तक दिव्यांग विद्यार्थी के लिए रैंप नहीं है। पुस्तकालय तक जाने के लिए व्यवस्था नहीं है। एम्स परिसर में दिव्यांग मरीजों के लिए अलग से कोई इंतजाम नहीं है। ऐसी स्थिति में संस्थान को आगे आकर अस्पताल में दिव्यांग मरीजों के लिए ज्यादा से ज्यादा सुविधाजनक कार्य करने चाहिए।