निजी स्कूलों में केजी में दाखिले की राह कठिन
- सीटें कम होने के कारण हो रही परेशानी, अधिकतम आयु सीमा तय होने भी हो रही दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी के निजी स्कूलों में नर्सरी के साथ केजी में भी दाखिला लेने वालों की राह आसान नहीं है। अधिकतम आयु सीमा तय होने के कारण इस साल दाखिला ज्यादा मुश्किल हो गया है। ज्यादा परेशानी इसलिए भी है क्योंकि स्कूल नर्सरी की गाइडलाइंस को केजी दाखिले के लिए नहीं मानते हैं।
दिल्ली में कुछ चुनिंदा स्कूलों में ही केजी दाखिले होते हैं। इनमें से भी कई ऐसे हैं जो अल्पसंख्यक स्कूलों की श्रेणी में आते हैं। इन स्कूलों में 50 फीसदी सीटें अल्पसंख्यक वर्ग के लिए तय होती है। वहीं कई स्कूलों मेें जहां नर्सरी और केजी दोनों है वहां नर्सरी वाले ही प्रमोट होकर केजी में जाते हैं। एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने बताया कि बीते साल कई अभिभावकों ने मार्च में पैदा हुए बच्चे का दाखिला नर्सरी में इसलिए नहीं कराया कि बच्चा छोटा है और अगले साल केजी में दाखिला करा लेंगे। लेकिन इस साल अधिकतम आयु सीमा तय हो गई। इस कारण से ना ही वह बच्चे नर्सरी में दाखिले के योग्य रहे और ना ही केजी में दाखिले के योग्य रहे।
उन्होंने कहा कि नर्सरी क्लास लगभग सभी स्कूलों में प्रवेश स्तर कक्षा होती है जबकि बेहद कम स्कूल हैं जहां केजी प्रवेश स्तर की कक्षा है। शिक्षा निदेशालय ने नर्सरी, केजी व पहली कक्षा के लिए गाइडलाइंस दी है लेकिन बेहद कम ही स्कूल उन्हें केजी पर भी लागू करते हैं। केजी के लिए कोई तय कैलेंडर भी नहीं है। अधिकतर स्कूल दिसंबर से दाखिले शुरू करते हैं जो अप्रैल तक जारी रहते हैं। शिक्षा निदेशालय को चाहिए कि वह केजी के लिए भी मानक व सीटों की संख्या मंगवाए। स्कूलों को इन कक्षाओं के लिए भी सख्त दिशानिर्देश जारी किए जाएं।