ग्रेनो की गंगाजल परियोजना
आठ साल से नहीं बुझी मीठे पानी की प्यास, अब ग्रांट की भी टूट रही आस
- 31 मार्च तक प्रोजेक्ट पूरा न होने पर 33 करोड़ रुपये का अनुदान नहीं मिलेगा
नंबर गेम
290 करोड़ है लागत
85 क्यूसेक क्षमता
5 लाख लोगों को मिलेगा मीठा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा।
आठ साल पुरानी गंगाजल परियोजना पूरी न होने से एक तरफ तो ग्रेनोवासी मीठे पानी को तरस गए तो दूसरी तरफ अब ग्रेनो प्राधिकरण को 33 करोड़ रुपये का नुकसान भी होने जा रहा है। अगर इससे बचना है तो 31 मार्च तक प्रोजेक्ट पूरा करना होगा। हालांकि प्राधिकरण के अधिकारी भी इतने समय में पूरा कर पाने में असमर्थता जता रहे हैं।
दरअसल, नोएडा की तरह ही ग्रेटर नोएडा का पानी भी खारा है। इससे ग्रेनोवासियों को परेशानी हो रही है। 25 मई 2010 को गंगाजल परियोजना पर मुहर लगी थी। उसी साल अगस्त में काम भी शुरू हो गया। उस समय 45 क्यूसेक क्षमता के प्लांट पर काम शुरू हुआ। इसे एक साल में पूरा करने का लक्ष्य भी तय कर दिया गया, लेकिन अगले दो साल तक नहीं बन सका। किसानों से जमीन विवाद इसकी मुख्य वजह रही।
इस बीच ग्रेनो प्राधिकरण ने एनसीआरपीबी (एनसीआर प्लानिंग बोर्ड) से कर्ज के लिए आवेदन कर दिया, जो कि 2013 में करीब 224 करोड़ रुपये मंजूर भी हो गया। बोर्ड ने यह पैसे खुद के बजाय जर्मनी की वित्तीय संस्था केडब्ल्यूएफ से 7.5 फीसदी वार्षिक ब्याज पर कर्ज दिलाया। कर्ज मिलने पर परियोजना की क्षमता 85 क्यूसेक कर दी गई। साथ ही एक शर्त यह भी रखी कि अगर प्राधिकरण ने समय से प्रोजेक्ट पूरा कर लिया तो लोन की कुल रकम में से 15 फीसदी अनुदान मिल जाएगा। तब वर्ष 2015 में इसे पूरा करने को कहा गया। उस समय भी पूरा नहीं हो सका और अब तक काम चल रहा है। जमीन का विवाद कोर्ट में होने की बात कहकर प्राधिकरण भी संस्था से समय बढ़वा ले रहा है। हाल ही में जर्मन संस्था व एनसीआरपीबी के प्रतिनिधि ग्रेटर नोएडा आए।
परियोजना का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने 31 मार्च तक इसे पूरा करने का अंतिम अवसर दिया है। अगर यह तिथि भी पीछे छूटी तो अनुदान की राशि नहीं मिल सकेगी, जो कि लगभग 33 करोड़ रुपये है। हालांकि इस परियोजना की कुल लागत करीब 290 करोड़ रुपये है। प्राधिकरण के अधिकारी भी मान रहे हैं कि जमीन का मसला फंसा हुआ है उससे तो यही लगता है कि 31 मार्च तक परियोजना पूरी नहीं हो सकेगी।
एक नजर प्रोजेक्ट पर
ग्रेटर नोएडा में 85 क्यूसेक गंगाजल आपूर्ति की योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए गाजियाबाद के देहरा गंग नहर से ग्रेटर नोएडा तक पाइप लाइन बिछाई जा रही है। देहरा से करीब 11 किलोमीटर आने पर प्राइमरी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। वहां से 18 किलोमीटर दूरी पर स्थित पल्ला में दूसरा प्लांट बनाया जा रहा है। इसके बाद ग्रेटर नोएडा के मास्टर रिजर्ववायर तक पानी आना है। वहां से वितरण के लिए बने रिजर्ववायर तक पहुंचाया जाएगा और फिर ओओवरहेड टैंक के जरिये सप्लाई होगी। जमीन विवाद के चलते कई जगह काम अटका हुआ है। किसान 64.7 फीसदी मुआवजा और छह फीसदी विकसित भूखंड मांग रहे हैं।
कोट
एनसीआरपीबी और जर्मन संस्था से 31 मार्च तक का समय मिला है। प्राधिकरण की कोशिश है कि इस तिथि तक काम पूूरा कर लिया जाए, जिससे कि शहरवासियों को समय पर गंगाजल मिल सके और प्राधिकरण को इस पर ग्रांट भी मिल जाए।- केके गुप्त, एसीईओ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण।