एचआईवी मरीजों को सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल रही दवा
-हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर किया गया दावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी के सरकारी अस्पतालों में एचआईवी पीड़ित गरीब मरीजों को दवाएं नहीं मिल रही हैं जबकि केंद्र व दिल्ली सरकार ने दवा की कमी नहीं होने देने का आश्वासन मई 2017 में कोर्ट को दिया था। यह दावा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर किया गया है। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति सुनील गौड़ ने अवमानना याचिका पर नोटिस जारी करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। याची ने केंद्र, दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण समिति (नाको) पर जानबूझकर आदेश का पालन न करने का आरोप लगाते हुए अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। याचिका पर अगली सुनवाई अब 12 मार्च को होगी।
पेश अवमानना याचिका रेखा देवी ने दायर की है। रेखा देवी की याचिका पर ही केंद्र, दिल्ली सरकार व नाको ने सरकारी अस्पतालों व एआरटी केंद्रों ने एआरवी दवा की कमी न होने का आश्वासन दिया था। याची ने सरकारी अस्पतालों में दवा न मिलने का दावा करते हुए याचिका दायर की थी।
न्यायालय की अवमानना याचिका में कहा गया है कि देश में 21 लाख एचआईवी पीड़ित हैं और एआरटी से नियंत्रण किया जा सकता है। दवा से इस संक्रमण को नियंत्रण किया जा सकता है जिससे मरीज लंबे समय तक जी सकता है। इलाज व दवा मिलने पर एचआईवी का संक्रमण एड्स में तब्दील नहीं होता है। इसकी दवा का सालाना खर्च करीब डेढ़ लाख रुपये आता है, जिसके लिए गरीब मरीज पूरी तरह सरकारी अस्पताल पर निर्भर रहता है। इन अस्पतालों व एआरटी केंद्रों पर दवा न होने से गरीब मरीज बुरी तरह परेशान हैं। इसलिए केंद्र, दिल्ली सरकार व नाको को इन उपचार केंद्रों पर पर्याप्त दवा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा आश्वासन पूरा न करने पर अदालती अवमानना की कार्यवाही की जाए।