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लाखों दिव्यांगजनों को बिल में पारित लाभ पहुंचाने में सरकार चुस्ती दिखाए

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दिव्यांगों के मुद्दे पर विजेंद्र
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गुप्ता ने सरकार को घेरा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। शुक्रवार को नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि दिव्यांगों के साथ भेदभाव को दंडनीय बनाने और संयुक्त राष्ट्र के अनुरूप नि:शक्त व्यक्ति अधिकार अधिनियम-2016 को लागू करने में सुस्त रवैया अपनाया जा रहा है। गत ढाई वर्ष में अधिनियम को लागू करने में सरकार ने कोई रुचि नहीं दिखाई। कार्यकाल पूरा होने में मात्र 15 महीने बचे हैं तो उसने इस संभावना का पता लगाने के लिए कमेटी बनाई है कि क्या दिव्यांगों की समस्या दूर करने के लिए पृथक विभाग बनाया जा सकता है। कमेटी से दो महीने में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिव्यांगों के लिए पृथक विभाग बनाने को स्वीकृति मिल जाती है तो ऐसा करने वाला यह देश में पहला केंद्र शासित प्रदेश होगा। 2011 की जनगणना के अनुसार, दिल्ली में 2,34,882 दिव्यांग हैं। यह संख्या 6 वर्ष पूर्व विद्यमान केवल 7 श्रेणियों की है। वर्तमान में सभी 21 श्रेणियों को सम्मिलित करें तो दिव्यांगों की संख्या 50 लाख से भी ऊपर होने का अनुमान है। विपक्ष के नेता ने कहा कि अब तक दिव्यांगों की केवल 7 श्रेणियां हैं, जबकि बिल पास होने पर ये 21 हो जाएंगी। विधेयक में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण तीन से बढाकर चार प्रतिशत करने का प्रावधान है। इससे लाखों दिव्यांगों को लाभ मिलेगा। दिल्ली में लाखों लोग रक्त की बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें थैलेसीमिया, हैमोफीलिया तथा सिकलसैल जैसी बीमारियां हैं। सभी श्रेणियों को आरक्षण देने के लिए चार वर्ग में बांटा गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए एक प्रतिशत आरक्षण होगा। उन्होंने सरकार से कानून जल्द से जल्द लागू करने की मांग की।
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