सेंट्रल पार्क में शुरू हुआ 6 दिवसीय जश्र-ए-विरासत उर्दू
- दिल्ली की सांस्कृतिक और साहित्यिक इतिहास का अभिन्न अंग है उर्दू : सिसोदिया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उर्दू भाषा दिल्ली के सांस्कृतिक और साहित्यिक इतिहास का अभिन्न अंग है। जो यहां की मिलीजुली संस्कृति को चिन्हित करती है। उर्दू में दिलों तक उतरने की खासियत है। जो उर्दू के चाहने वालों में इसकी लोकप्रियता और बढ़ाती है। दिल्ली के कनाट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में जश्र-ए-विरासत उर्दू का उद्घाटन करते हुए उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यह बात कही। यह उत्सव 10 नवंबर से 15 नवंबर तक चलेगा और दर्शकों का प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।
सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में उर्दू की लोकप्रियता को देख जश्न-ए-विरासत कार्यक्रम की शुरूआत की गई। दिल्ली के इतिहास में उर्दू का बड़ा महत्व रहा है। आज भी इसकी मिठास पुरानी दिल्ली के लोगों की जुबान में झलकती है। इस भाषा को बढ़ावा देने के लिए ही दिल्ली सरकार ने यह कार्यक्रम की शुरुआत की है। ताकि इससे लोगों के दिलों को जोड़ा जा सके। छह दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में दर्शकों के लिए अलग-अलग दिन शायरी, कव्वाली, किस्सा गोई, दास्तान गोई, शैली चार-ए-बात और गजलों समेत अन्य पेशकश होंगी। इस बीच नामी शायर और गायक दिल्ली वालों का उर्दू की जुबानी मनोरंजन करेंगे। इनमें सुरेश वाडेकर और जावेद अली जैसे बॉलीवुड के नामी चेहरे भी शामिल हैं।