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सड़क पर उतरा डीटीसी के अस्थायी कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन

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सड़क पर उतरे डीटीसी के अस्थायी कर्मचारी
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- डीटीसी बसों और सड़कों पर लोगों के बीच सरकार की नीतियों का किया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डीटीसी के अस्थायी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 17वें दिन भी आईपी डिपो पर धरना-प्रदर्शन पर रहे। अस्थायी कर्मचारियों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई है। शनिवार को कर्मचारियों ने डीटीसी बसों में, सड़कों पर और बस स्टैंड पर आम लोगों में प्रशासन के रवैये के बारे में जागरूकता फैलाई। कर्मचारियों का कहना है कि डीटीसी प्रबंधन लगातार अस्थायी कर्मचारियों को काम से निकाल रहा है।
डीटीसी कान्ट्रेक्चुअल इंप्लाइज यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज शर्मा ने बताया कि राष्ट्रपति को इच्छा मृत्यु के संबंध में कर्मचारियों ने तीन दिन पहले ज्ञापन दिया है। फिलहाल इस बारे में राष्ट्रपति की तरफ से उन्हें कोई प्रति उत्तर नहीं मिला है। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की तानाशाही लगातार जारी है, जिस कारण कर्मचारियों को काम से निकाले जाने का आंकड़ा काफी बढ़ गया है।
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प्रशासन के रवैये से परेशान कर्मचारियों ने शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रही डीटीसी की बसों में यात्रियों को दिल्ली सरकार की तानाशाही के बारे में बताया। कर्मचारियों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगे नहीं मानती, कर्मचारी पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, कर्मचारियों ने लोगों के बीच यह मुद्दा भी रखा कि धरने के जरिए सत्ता में आई दिल्ली सरकार अब डीटीसी के अस्थायी कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन को गैरकानूनी करार देकर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। डीटीसी में निजी बसों को लाने पर रोक और काम से निकाले गए कर्मचारियों को काम पर रखा जाए।
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