11 माह बाद भी कोर्ट परिसर में फायरिंग मामले में पुलिस के हाथ खाली
- 31 दिसंबर 2017 को हर्ष फायरिंग करने का दो वकीलों पर है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तीस हजारी जिला अदालत में कथित फायरिंग की घटना के 11 माह बाद भी दिल्ली पुलिस के हाथ खाली हैं। इस मामले में इस्तेमाल पिस्टल व मोबाइल आरोपी वकीलों से बरामद नहीं हो पाई है। 31 दिसंबर 2017 की रात कोर्ट परिसर में दो बार पदाधिकारियों पर पिस्टल से फायरिंग व उसका लाइव वीडियो फेसबुक पर डालने का आरोप है।
तीस हजारी अदालत के महानगर दंडाधिकारी बबरू भान के समक्ष थाना सब्जी मंडी के उपनिरीक्षक विशन ने बयान में कहा कि उन्हें इस मामले की जांच तीन जनवरी 2018 को मिली थी। इस सिलसिले में आरोपी अधिवक्ता मनीष शर्मा व अन्य वकीलों से पूछताछ की गई। फोटोग्राफ भी दिखाए गए लेकिन उन्होंने वारदात में इस्तेमाल पिस्टल पेश नहीं किया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र कुमार के समक्ष याची के वकील दीपक शर्मा ने कहा कि फेसबुक वीडियो में दिख रही पिस्टल नहीं बल्कि टॉय गन है तो उसे पेश क्यों नहीं किया गया। इसकी तस्दीक तभी हो सकती है जब इस पिस्टल व फेसबुक वीडियो को मंगवाया जाए। पेश मामले में शिकायतकर्ता वरुण शर्मा ने पुलिस अधिकारियों को अधिवक्ता मनीष शर्मा, अजय अत्री व अन्य कई वकीलों के खिलाफ शिकायत दी थी। कार्रवाई नहीं होने पर वरुण शर्मा ने इन वकीलों पर एफआईआर दर्ज करने के लिए कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156 (3) व 200 के तहत अर्जी दायर की थी।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में एफआईआर का निर्देश देने से इंकार कर दिया था। थाना सब्जी मंडी पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जो पिस्टल फोटोग्राफ में आरोपियों के हाथों में दिख रही है वह असली नहीं बल्कि टॉय गन है। पुलिस इस नतीजे पर अधिवक्ता महाराज सिंह व प्रेम प्रकाश के बयान दर्ज करने के बाद पहुंची थी। इस फैसले के वरुण शर्मा ने सत्र अदालत में चुनौती दी थी।