कॉलेजों में प्रमोशन और प्रोफेसरशिप का रास्ता खुला
- पुराने लंबित मामलों को राहत देने पर बनी सहमति
- डीयू द्वारा यूजीसी रेगुलेशन-2018 के संशोधन के लिए गठित कमेटी की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा यूजीसी रेगुलेशन-2018 के संशोधन और नियमन के लिए गठित उच्च स्तरीय कमेटी की शुक्रवार को बैठक हुई। जिसमें शिक्षकों से जुड़े मुद्दे खासकर प्रमोशन के मुद्दे पर चर्चा की गई। नए रेगुलेशन में पुराने लंबित मामलों को राहत देते हुए प्रमोशन का रास्ता साफ किया गया है। अब शिक्षकों के सामने एपीआई रहित रेगुलेशन-2018 और रेगुलेशन 2010 में से किसी भी एक को अपने प्रमोशन के लिए चुनने के लिए दो विकल्प हैं।
उच्च स्तरीय कमेटी के सदस्य प्रो हंसराज सुमन ने बताया कि बैठक में सर्व सम्मति से शिक्षकों को बड़ी राहत देने पर सहमति बन गई है। नए रेगुलेशन में शिक्षकों को रिफ्रेशर और ओरिएंटेशन की बाध्यता से राहत दी गई है। वर्ष 2018 तक जिन शिक्षकों के प्रमोशन लंबित होंगे, उन्हें रिफ्रेशर से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। उन्होंने बताया कि लगभग तीन हजार शिक्षकों के प्रमोशन 10 वर्षों से अधिक समय से लंबित हैं।
प्रो सुमन ने उम्मीद जताई कि लंबे समय से जिन लोगों का प्रमोशन लटका हुआ था उनका प्रमोशन हो सकेगा। बैठक में विभिन्न प्रकार के अवकाश को लेकर भी चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि कई कॉलेजों मेें प्रिंसिपल शिक्षकों को छुट्टी देने में व्यवधान उत्पन्न करते हैं। प्रो सुमन ने बैठक में डूटा की प्रिंसिपल को पांच साल का ही कार्यकाल देने की मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इससे प्रिंसिपल मनमानी नहीं कर पाएंगे। प्रिंसिपल का कार्यकाल सीमित होने से ज्यादा से ज्यादा शिक्षकों को कॉलेज का प्रिंसिपल बनने का मौका मिलेगा। डूटा काफी समय से प्रिंसिपल के कार्यकाल को सीमित करने की मांग करता आ रहा है। बैठक में कॉलेजों में बनने वाले प्रोफेसर को भी 10 साल की सेवा के बाद ही कुलपति पद के लिए योग्य मानने पर चर्चा हुई।