होम्योपैथी बीमार का इलाज करती
है, न कि बीमारी का : डा. गुप्ता
- होम्योपैथी दवा और चिकित्सा को मानकीकृत करने की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। होम्योपैथी बीमार का इलाज करती है, न कि बीमारी का। यह दुनिया की दूसरी बड़ी चिकित्सा प्रणाली है और इसमें व्यक्तिगत उपचार पर जोर दिया गया है। यही कारण है कि एलोपैथी से 59 फीसदी लोगों ने होम्योपैथी की ओर रुख कर लिया है। पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित डा. वीके गुप्ता ने होम्योपैथी पद्धति पर आयोजित ‘होम्योपैथी के मानकीकरण’ कार्यक्रम में उक्त विचार प्रकट किए।
डा. गुप्ता ने कहा महाराजा रंजीत सिंह भी होम्योपैथी से ही इलाज करवाते रहे हैं। प्रति वर्ष 50 मिलियन मरीज होम्योपैथी से ही इलाज करवाते हैं। करीब 86 देशों में होम्योपैथी पद्धति से लोग लाभ ले रहे हैं। इतना ही नहीं 77 फीसदी लोग इस पद्धति पर विश्वास करते हैं। गर्भवती महिलाओं को अन्य दवाएं न लेने के लिए कहा जाता है लेकिन होम्योपैथी दवा से कोई नुकसान नहीं होता।
इस मौके पर भारतीय और अंतरराष्ट्रीय होम्योपैथी विशेषज्ञों ने चिकित्सा के पारंपरिक रूप को मानकीकृत और लोकप्रिय बनाने के लिए सुरक्षित होम्योपैथिक वितरण अभ्यास को लागू करने की जरूरत पर बल दिया। ‘होम्योपैथी के मानकीकरण’ पर कार्यक्रम में फ्रांस और भारत के विशेषज्ञों ने मरीजों को आधुनिक होम्योपैथिक दवाएं लिखने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया।