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सपा और कांग्रेस के नेताओं ने दिया किसानों के धरने को सर्मथन

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जेवर में प्रस्तावित एयरपोर्ट का मामला
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सपा और कांग्रेस के नेताओं ने दिया किसानों के धरने का समर्थन
या
किसानों के समर्थन में आए सपा और कांग्रेस नेता
- सर्किल रेट के चार गुना मुआवजे की मांग जायज : सुरेंद्र नागर
अमर उजाला ब्यूरो
जेवर। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने एयरपोर्ट की जमीन अधिग्रहण को लेकर जारी किसानों के धरने का समर्थन किया है। रविवार को दायनतपुर गांव पहुंचे दोनों पार्टी के नेताओं ने कहा कि जेवर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की जमीन अधिग्रहण का मुआवजा सर्किल रेट का चार गुना दिया जाना चाहिए। नेताओं ने एक सप्ताह से धरना दे रहे किसानों की मांगों को जायज बताया और मांगें पूरी होने तक साथ देने का वादा किया।
जेवर क्षेत्र के दयानतपुर गांव में 23 सितंबर से कुछ किसान मुआवजा बढ़ाने व अन्य मांगो को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। रविवार को सपा के राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर और जिला कार्यकारिणी के नेता धरना स्थल पर पहुंचे। वहीं कांग्रेसी स्थानीय नेताओं भी समर्थन दिया है। नागर ने कहा कि किसान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा, आवासीय जमीन के बदले विकसित क्षेत्र में जमीन व नौकरी की जो मांग कर रहे है, वो किसानों का वास्तविक हक है। किसानों के हकों की लड़ाई के लिए सपा मांग पूरी होने तक किसानों के साथ खड़ी रहेगी। धरने पर बैठे किसानों ने बताया कि आने वाले रविवार को रणनीति तैयार कर किसान आगे का फैसला लेंगे, लेकिन मांग पूरी होने तक किसान धरने को किसी भी हालत में खत्म नहीं करेंगे।
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वहीं कांग्रेस से सिकंद्राबाद के पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सोलंकी, मनोज चौधरी, अनुज ठाकुर, सतीश शर्मा, सपा से नरेंद्र नागर, फकीरचंद नागर व वीर सिंह यादव, किसान नेता अजय प्रताप सिंह शामिल रहे। धरने में बडे़ नेताओं के आने की सूचना के बाद सुबह से ही पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अर्लट पर रहा लेकिन किसानों के शांतिपूर्ण धरने के समापन के बाद पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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बिना अनुमति के हुआ आयोजन
जिले में धारा 144 लागू है। उसके बावजूद किसानों ने बिना अनुमति के दयानतपुर गांव में धरने का आयोजन किया है। जेवर कोतवाली प्रभारी सुरेंद्र सिंह भाटी का कहना है कि सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी, लेकिन वहां पर किसी तरह का भड़काऊ भाषण नहीं दिया गया। धरना शांतिपूर्ण समाप्त हुआ। धरना स्थल पर लगभग 100-150 किसान पहुंचे थे। वहां कानून व्यवस्था की स्थिति कायम थी।
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