हार्डवर्क नहीं अब स्मार्टवर्क की जरूरत : सिसौदिया
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सात दिन के चिंतन से निकली है एनएसयूटी: सिसौदिया
क्रासर
- नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के उद्घाटन अवसर पर बोले उपमुख्यमंत्री
- सरकार ने विश्वविद्यालय दिया, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में शुमार का काम आपका
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनएसयूटी) का उद्घाटन बुधवार को उपमुख्यमंत्री ने किया। इस मौके पर सिसौदिया ने कहा कि छात्र व शिक्षक मिलकर इसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में शुमार करें। अब हार्डवर्क नहीं, स्मार्टवर्क की जरूरत है। एनएसयूटी का आइडिया रायपुर में सात दिन के वर्कशॉप के दौरान आया।
एनएसयूटी कैंपस में बुधवार को एक वेबसाइट भी छात्रों को समर्पित किया गया। सिसौदिया ने बताया कि नेताजी सुभाष तकनीकी संस्थान से नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का सफर रायपुर में वर्कशाप के सात दिन के चिंतन-मनन से निकला है। इस दौरान सिर्फ तकनीकी विश्वविद्यालय बनाने पर ही नहीं, बल्कि फैकल्टी व रिसर्च पर भी मंथन किया गया। एनएसआईटी के पूर्व डायरेक्टर व डीटीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने इसका आइडिया दिया था। प्रो. सिंह के अथक प्रयासों के चलते विश्वविद्यालय आज से दिल्ली के युवाओं के लिए खोल दिया गया। इससे फैकल्टी, कोर्स डिजाइन, रिसर्च, इंटेक समेत कोर्स शुरू करने के लिए किसी से अनुमति की जरूरत नहीं होगी। सिसौदिया ने कहा कि विश्वविद्यालय को पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी। अब 37 सौ से आगामी सालों में छात्रों की संख्या 12 हजार तक होगी। सभी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट् के प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वह अपने संस्थान को विश्व के टॉप 10 में शामिल करने पर ध्यान दें।
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करोड़ो के पैकेज नहीं रिसर्च से मिलती है पहचान
शिक्षा मंत्री ने रिसर्च कर रहे छात्रों से कहा कि किसी विश्वविद्यालय का नाम सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं है कि वहां कैंपस प्लेसमेंट में कितने छात्रों को लाखों-करोड़ों रुपये का पैकेज मिला। पैकेज तो ऊपर-नीचे होता रहता है। किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान इस बात पर निर्भर है कि वहां से रिसर्च के फील्ड में क्या किया गया। इसलिए एनएसयूटी के स्टूडेंट्स रिसर्च पर फोकस करें।
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-दुनिया के सर्वश्रेष्ठ में जगह बनाना चुनौती : कुलपति
डायरेक्टर प्रो. जेपी सैनी को ही विश्वविद्यालय का नया कुलपति बनाया गया है। उन्होंने विश्वविद्यालय के उद्घाटन के साथ ही कुलपति के रूप में पदभार भी संभाल लिया। कुलपति प्रो. सैनी के मुताबिक, तकनीकी संस्थान से प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बनने का सफर तो खुशी देने वाला है। हालांकि असल चुनौती अब विश्वविद्यालय को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में शुमार करना होगा।
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मंजूरी की देरी पर केंद्र सरकार पर कसा तंज
मनीष सिसौदिया ने विश्वविद्यालय की मंजूरी की फाइल ढाई से तीन साल तक लटकाने पर केंद्र सरकार पर तंज भी कसा। सिसौदिया ने कहा कि केंद्र सरकार गाय और मंदिर पर काम करती है। गाय को पीटने वाले ढाई घंटे में गिरफ्तार हो सकते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की फाइल में ढाई साल की देरी हो जाती है।