एनआरआई दूल्हों द्वारा पत्नियों
को छोड़ना गंभीर मुद्दा: हाईकोर्ट
- डीएसजीएमसी ने की महिलाओं के हितों की रक्षा करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एनआरआई दूल्हों द्वारा अपनी भारतीय पत्नियों को छोड़ने की समस्या को एक गंभीर मुद्दा बताया है। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की जरूरत है। अदालत ने इस याचिका पर विधि मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व राष्ट्रीय महिला आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (डीएसजीएमसी) द्वारा दायर याचिका पर यह नोटिस जारी किया है। याचिका में एनआरआई पतियों द्वारा छोड़ी गई महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए दिशा-निर्देेश बनाने की मांग की गई है। खंडपीठ ने कहा कि यह गंभीर मुद्दा है और इस पर सुनवाई किए जाने की जरूरत है। इस याचिका पर अगली सुनवाई 9 जनवरी 2019 को होगी।
पेश याचिका में कहा गया कि एनआरआई दूल्हों द्वारा पत्नियों को छोड़ देने की समस्या बेहद गंभीर है और इस पर फौरन विचार करने और दिशा-निर्देश बनाने की जरूरत है। याचिका पर जिरह करते हुए अधिवक्ता जसलीन चहल व मनप्रीत कौर ने कहा कि जब भारतीय लड़की एनआरआई लड़के से शादी कर विदेश जाती है तो उसे वहां जाकर पता चलता है कि वह लड़का पहले से शादीशुदा है और लिव इन रिलेशन में रहता है।
याचिका में कहा गया कि एनआरआई लड़के कई बार अपने माता-पिता के दबाव में शादी करते हैं और अपनी भारतीय पत्नियों को घर की नौकरानी की तरह छोड़ देते हैं। इन महिलाओं को दोबारा बुलाने के वादे के साथ वापस भेज दिया जाता है, लेकिन उन्हें कभी दोबारा वापस नहीं बुलाया जाता। इनमें से कई महिलाएं गर्भवती होती हैं। पति द्वारा छोड़े जाने के बाद यह बिल्कुल असहाय हो जाती हैं।