हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण के खिलाफ सुनवाई की बंद
सुप्रीम कोर्ट खुद कर रही है निगरानी, याचिकाओं पर सुनवाई का औचित्य नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राजधानी में अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ विचाराधीन 20 से अधिक जनहित याचिकाओं पर सुनवाई बंद कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिशा निर्देश जारी किये हैं और खुद इन मामलों की निगरानी कर रहा है। ऐसे में इन याचिकाओं को यहां लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अनाधिकृत व अवैध निर्माण के खिलाफ लोगों की शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था बना दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 24 अप्रैल व 18 जुलाई के आदेश में साफ कर दिया था कि अवैध निर्माण की सीलिंग व तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं रुकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी अवैध निर्माण में लिप्त बिल्डरों, ठेकेदारों व वास्तुकारों को काली सूची में डालने के लिए दिशा-निर्देश बनाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर सीबीआई को अवैध निर्माण के खिलाफ अपनी जांच को जारी रखने का आदेश भी दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डीडीए ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई और बिल्डिंग बनाने के नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और एक समिति को गठन किया है। एसटीएफ और कमेटी को राष्ट्रीय सूचना केंद्र और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) की मदद से दिल्ली की डिजिटल मैपिंग करने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया है।