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राजधानी के तीन अस्पतालों को अवमानना नोटिस

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राजधानी के तीन अस्पतालों
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को अवमानना का नोटिस

- एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का लगाया आरोप
- गरीब मरीजों को निशुल्क उपचार नहीं देने से जुड़ा है मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना के मामले में राजधानी के तीन बड़े अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया कि राजधानी के यह अस्पताल गरीब लोगों को निशुल्क उपचार के संबंध में सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं।
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जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने एनजीओ सोशल ज्यूरिस्ट की याचिका पर राजीव गांधी कैंसर अस्पताल, सेंट स्टीफन अस्पताल व मूलचंद अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 23 अक्तूबर की तारीख तय की है। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने नौ जुलाई 2018 को आदेश जारी कर 10 प्रतिशत बेड आंतरिक रोगी विभाग व 25 फीसदी बेड बाह्य रोगी विभाग में आर्थिक पिछड़ा वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की श्रेणी के मरीजों के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया था। इससे पहले 2007 में हाईकोर्ट ने सोशल ज्यूरिस्ट की याचिका पर यही निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने एक तरह से हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया था। याचिका पर जिरह करते हुए अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि कोर्ट के इन निर्देशों का ज्यादातर अस्पताल पालन कर रहे हैं लेकिन यह तीन अस्पताल इसका पालन नहीं कर रहे हैं। इन अस्पतालों ने सरकार से रियायती दर पर जमीन ली थी। इन अस्पतालों ने गरीब लोगों के इलाज पर सहमति दी थी लेकिन अब यह अस्पताल इसका पालन नहीं कर रहे हैं। यह अदालत की अवमानना है।
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