सफाई कर्मियों की मौत पर सियासत, भाजपा ने सीएम आवास पर किया प्रदर्शन
-मृतकों को परिजनों को मुआवजा देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मोती नगर में सीवर सफाई के दौरान दम घुटने से पांच सफाई मजदूरों की मौत मामले में मंगलवार को मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के आवास पर रोष प्रदर्शन किया। उन्होंने दिल्ली सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की।
मोर्चा के प्रदेश महामंत्री कुलजीत सिंह चहल के नेतृृत्व में प्रदर्शनकारी चंदगीराम अखाड़े के पास इकट्ठा हुए और वहां से अरविन्द केजरीवाल सरकार के विरुद्ध नारे लगाते हुए मुख्यमंत्री आवास के समीप तक पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें रोका। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए चहल ने कहा कि केजरीवाल सरकार की मानवीय संवेदनाएं मर चुकी हैं और वह अपनी नैतिक जिम्मेदारी से हर मामले में बचती है चाहे वह सीवर सफाई कर्मियों की मृृत्यु का मामला हो या फिर गत माह पटपड़गंज में तीन बच्चों की भूख से मृृत्यु का। हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग
सफाई कर्मचारियों की मौत मामले में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी, भाजपा करोल बाग जिला अध्यक्ष भारत भूषण मदान ने घटनास्थल पर जाकर स्थानीय आरडब्ल्यूए और सफाई कर्मचारी यूनियनों से ंमुलाकात की। इस मौके पर तिवारी ने कहा सफाई कर्मचारियों की लगातार हो रही मौतों के बावजूद मुख्यमंत्री ने कोई सबक नहीं लिया है। पिछले वर्ष मेनुअल सीवर एवं सेप्टिक टैंक पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद सफाई कर्मचारी अपनी रोजी-रोटी के लिए अभी भी मेनुअल काम करने पर मजबूर हैं। तिवारी ने कहा कि 5 सफाई कर्मचारियों की मौत को सिर्फ एक हादसा ही नहीं मानना चाहिए बल्कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और जल बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
कर्मचारियों की स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग
विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने भी दिल्ली सरकार से मैनुअल स्कैवेंजर्स सीवर की हाथ से सफाई करने वाले कर्मचारियों की स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र में रविवार को पश्चिमी दिल्ली की सोसाइटी में हुए पांच मजदूरों की मौत की भी विस्तृत जांच शामिल हो। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा गठित फेक्ट फाइंडिंग जांच कमेटी का गठन मात्र दिखावा है। दिल्ली सरकार इस त्रासदी को लेकर कतई गंभीर दिखाई नहीं दे रही। हर विभाग और एजेंसी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं। ऐसा लगता है कि इन पांच लोगों की मौतों के लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं है।