एमफिल-पीएचडी कोर्सेज में दाखिले लटके
- शोध विषयों की पढ़ाई शुरू नहीं होने से सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में
- संगठनों ने कहा, प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी से अधिक अंक लाने का क्राइटेरिया वापस लें
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में एमफिल-पीएचडी के दाखिले लटकने से सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में है। एमफिल-पीएचडी प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी से अधिक अंक लाने के विरोध के बाद डीयू प्रशासन ने दाखिले पर रोक लगा दी थी। तब से अब तक दाखिले शुरू नहीं हो सके हैं। इस कारण से डीयू से एमफिल-पीएचडी करने के इच्छुक छात्र काफी परेशान हैं। इस मामले को लेकर सोमवार को क्रांतिकारी युवा संगठन ने अन्य संगठनों के साथ मिलकर कैंपस में एक जनसभा कर इस 50 फीसदी से अधिक अंक लाने के क्राटेरिया वापस लेने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न विभागों में एमफिल व पीएचडी दाखिला प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन प्रवेश परीक्षा मेें 50 फीसदी अंकों की अनिवार्यता के नए नियम के कारण बहुसंख्यक छात्र इंटरव्यू के लिए अयोग्य साबित हो गए। पहले एमफिल व पीएचडी में दाखिले के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा में हर वर्ग के अलग-अलग प्रवेश अंक होते थे। इस कारण एससीए-एसटी और ओबीसी छात्रों को आरक्षण का अधिकार मिलता था, लेकिन नए नियम से आरक्षित व अनारक्षित विद्यार्थियों के लिए एक क्राइटेरिया कर दिया गया जोकि आरक्षण के संवैधानिक नियमों के खिलाफ है। क्रांतिकारी युवा संगठन ने डीयू प्रशासन से यूजीसी द्वारा एमफिल-पीएचडी दाखिलों में योग्यता निर्धारण के इस फरमान के स्थान पर पुराने नियमों के अनुसार दाखिला जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की है।