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ई सिगरेट बिक्री मुद्दा

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ई-सिगरेट की बिक्री पर नियंत्रण की नीति लागू न करने पर फटकार
हाईकोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने दिया निर्देश

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । हाईकोर्ट ने ई-सिगरेट की बिक्री के नियंत्रण के संबंध में नीति लागू न करने पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। इस दिशा में कदम न उठाने पर संबंधित विभाग पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मैनन व न्यायमूर्ति वीके राव ने कहा कि सरकार को गंभीरतापूर्वक ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री व वितरण को नियंत्रित करने के लिए नीति लागू करनी चाहिए।
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खंडपीठ ने कहा सरकार ने जो हलफनामा पेश किया है, कोर्ट उससे संतुष्ट नहीं है। इसलिए एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश कर बताए कि इस दिशा में क्या किया जा रहा है। सरकार ने 2014 में इस संबंध में मसौदा लागू करने की बात कही थी। मामले की अगली सुनवाई के लिए सात सितंबर की तारीख तय की गई है। मामले में याचिकाकर्ता के वकील भुवनेश सहगल ने कोर्ट को बताया कि ई-सिगरेट की लत स्कूली छात्रों व नौजवानों में तेजी से फैल रही है। इसलिए सरकार को इस संबंध में नियंत्रण की नीति लागू करने का निर्देश दिया जाए। देश के छह राज्य खुद ही ई-सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।
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मंत्रालय ने 2014 में नीति बनाने की कही थी बात
याची का कहना है कि केंद्रीय परिवार व बाल कल्याण मंत्रालय ने 2014 में नीति बनाने की बात कही थी। सरकार ने 2017 में नीति बनाई लेकिन उसे लागू नहीं किया जा रहा है। इस कारण ई-सिगरेट व उसमें इस्तेमाल होने वाला निकोटिन युक्त लिक्विड खुले आम बाजार में बिक रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य निदेशालय ने हलफनामा पेश कर कहा था कि कुछ प्रकार के निकोटिन उत्पादन की अनुमति प्राप्त है, लेकिन ई-सिगरेट के लिए प्रयोग किया जाने वाला निकोटिन व ई-लिक्विड को यह अनुमति प्राप्त नहीं है। इसलिए ई-सिगरेट का कारोबार, उत्पादन, आपूर्ति व वितरण को डीसीए के अंतर्गत प्रतिबंधित किया जाएगा।
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