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पूर्वी दिल्ली में तीसरे दिन 11 घरों को किया सील

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पूर्वी दिल्ली में तीसरे दिन 11 घर सील
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- अभी तक करीब 80 मकान सील, खाली किए गए घरों के मालिकों से मांगा जा रहा संपत्ति का ब्यौरा

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के इतिहास में चल रही सबसे बड़ी सीलिंग अब कारोबारियों के अलावा घर मालिकों के लिए भी मुसीबत बन चुकी है। पूर्वी दिल्ली के विश्वास नगर में वर्षों से घरों में किराए पर फैक्ट्रियां चल रही थीं। इन्हें अब सील करने का सिलसिला शुरू हो चुका है। सोमवार को ऐसे 11 घरों को निगम की टीमों ने सील किया। जबकि पिछले तीन दिन में 80 घरों को सील किया जा चुका है। जिन घरों को कारोबारियों ने खाली कर दिया है, अब निगम उन घरों के मालिकों से संपत्ति कर का ब्यौरा मांग रही है।
समिति के एक सदस्य ने बताया कि पिछले दो दिन से शांति के साथ सीलिंग कार्रवाई की जा रही है। उम्मीद है कि आगे भी इसी तरह का सहयोग मिलेगा। बावजूद इसके पुलिस और अद्धसैनिक बलों की टीमें तैनात की गई हैं। उन्होंने बताया कि 16 अगस्त को 37, 18 अगस्त को 29 और 11 घरों को सील किया गया है। उधर, निगरानी समिति से मिली जानकारी के अनुसार विश्वास नगर में सीलिंग की कार्रवाई कुछ दिन और चलती रहेगी। निगम ने एक सर्वे के बाद यहां करीब 2 हजार फैक्ट्रियों को सील करने का निर्णय लिया है।
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दोगुना संपत्ति कर वसूलने की तैयारी
सूत्रों की मानें तो वर्षों से इस क्षेत्र में घरों में फैक्ट्रियां चल रही थीं। कुछ लोग संपत्ति कर दे रहे थे तो उसे घरेलू वर्ग में बताकर। जबकि ज्यादातर लोगों ने न आवासीय और न ही कामर्शियल संपत्ति कर का भुगतान किया। निगम अधिकारियों की मानें तो इन लोगों को अब प्रशासन ने राडार पर लिया है। पिछले 14 सालों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू हो चुका है। इन लोगों को नोटिस भेजने के बाद पूर्वी दिल्ली नगर निगम दोगुना संपत्ति कर वसूलने की तैयारी में है।


मिसयूज चॉर्ज के साथ संपत्ति कर जमा कराने पर ही राहत
पूर्वी दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि मिसयूज चॉर्ज जमा करने वालों की तादाद भी तेजी से बढ़ी है। पिछले कुछ दिन के भीतर मिसयूज चॉर्ज के रुप में निगम को 3 करोड़ 80 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि कारोबारियों और घर मालिकों को सीलिंग से राहत तभी दी जा सकेगी, जब मिसयूज चॉर्ज के साथ संपत्ति कर भी जमा होगा। निगम के इस रुख ने हजारों व्यापारियों और घर मालिकों की नींद ही उड़ा दी है।
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‘फैक्ट्रियां शुरू हो रही थीं तो कोई नियम क्यों नहीं बताया’
लोगों की मानें तो नियमों की आड़ में नगर निगम मनमानी कर रहा है। इन शर्तों के बारे में पहले उन्हें जानकारी नहीं दी गई थी। एक के बाद एक नए नियमों को लेकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि नगर निगम के अधिकारियों को भलीभांति जानकारी थी कि विश्वास नगर में वर्षों से फैक्ट्रियां चल रही हैं। जब फैक्ट्रियां शुरू हो रही थीं, उस वक्त निगम की ओर से कोई नियम कानून नहीं बताया गया। अब पूर्वी दिल्ली नगर निगम उनका शोषण कर रहा है।


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