पांच साल में अंगदान की बदली सूरत
नई दिल्ली। विश्व अंगदान दिवस पर सोमवार को राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें दिल्ली सरकार से लेकर निजी अस्पतालों तक ने चिकित्सकों ने मरीज और उनके परिजनों को अंगदान के बारे में जानकारी दी। साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. रजनीश मल्होत्रा का कहना है कि अंगदान को लेकर भारत हर साल बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहा है। चार से पांच वर्ष के भीतर दिल्ली में काफी बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं।
वहीं, नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. सारिका जिंदल बताती हैं कि अंगदान दिवस के दौरान उनके शिविर में 150 लोगों ने संकल्प लिया है। इसके लिए बाकायदा शपथ पत्र भी भरे हैं। डॉ. जिंदल का कहना है कि एक व्यक्ति ब्रेन डेड होने के बाद सात से 12 लोगों तक का जीवन बचा सकता है। नई तकनीकों के जरिए डॉक्टर उस ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगों से कई लोगों को नया जीवन दे सकते हैं। चूंकि ब्रेन डेड स्थिति में चिकित्सा भी जवाब देती है तो ऐसे में उक्त व्यक्ति के परिवार का फैसला कई जरूरतमंद परिवारों को खुशियां दे सकता है।
मैक्स अस्पताल के ही डॉ. विवेका कुमार बताते हैं कि मरीज के साथ-साथ परिवार को जागरूक करना होगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान लोगों से संकल्प भी लिया कि अस्पताल से वापस जाने के बाद अपने परिजनों और रिश्तेदारों को भी अंगदान के बारे में जानकारी देंगे।