निशुल्क पानी देने की योजना को चुनौती
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर दिल्ली सरकार और जलबोर्ड से मांगा जवाब
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की 20,000 लीटर पानी प्रतिमाह निशुल्क दिए जाने की नीति को जनहित याचिका दायर कर चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मैनन और न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को नोटिस जारी कर 19 नवंबर तक जवाब मांगा है। जनहित याचिका दायर करने वाले दो वकीलों का कहना है कि पानी बहुत तेजी से खत्म हो रहा संसाधन है। ऐसे हालात में इतनी अधिक मात्रा में पानी निशुल्क नहीं दिया जाना चाहिए। वह भी तब राजधानी के कई इलाकों में पाइप लाइन नहीं है और लोग पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं। याचिकाकर्ता अधिवक्ता तेजिंदर सिंह और अनुराग चौहान ने दिल्ली सरकार के 25 फवरी 2015 और दिल्ली जल बोर्ड 27 फवरी 2015 की उस अधिसूचना को उस रद्द करने की मांग की है जिसमें 20,000 लीटर निशुल्क पानी प्रतिमाह देने को मंजूरी दी गई है। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने यह योजना जल उत्पादन, आपूर्ति और रिसाइकल पर विचार किए बिना ही शुरू कर दी थी। ब्यूरो