अब तक का सबसे असफल रहा विधानसभा सत्र : विजेंद्र
सरकार ने पूरी शक्ति विपक्ष के आवाज को दबाने में लगाई, कई बिल भी लटके
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि दिल्ली विधानसभा का सत्र अब तक का सबसे निरर्थक और असफल सत्र साबित हुआ। सरकार ने पूरी शक्ति विपक्ष की आवाज को दबाने में लगा दी। कई कानून संबंधी बिल अभी भी लटके हैं। सत्र में सरकार ने एक भी विधेयक सदन में लाने की जहमत नहीं उठाई। गुप्ता ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार ने कैबिनेट निर्णयों पर आधारित मुद्दे को सदन में रखा। इसके लिए सदन को बुलाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। सीसीटीवी कैमरे लगाने, एमएलए फंड बढ़ाने, पेंशन संबंधी जानकारी देने जैसे विषयों की जानकारी बिना सदन बुलाए भी दी जा सकती थी। अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए जनता की कमाई से अर्जित करोड़ों रुपये के राजस्व को सरकार ने व्यर्थ गवां दिया।
‘मुख्यमंत्री सदन में 15-20 मिनट से ज्यादा नहीं बैठे’
गुप्ता ने कहा कि पांच दिन चले सदन में मुख्यमंत्री 15-20 मिनट से ज्यादा बैठना उचित नहीं समझे। विपक्ष ने जब भी सदन में बांग्लादेशी घुसपैठियों, महिला अधिकारी की प्रताड़ना जैसे जनहित के मुद्दे उठाए तो उसकी आवाज को बल पूर्वक दबा दिया। सदन से उन्हें तीन बार मार्शलों द्वारा जबरदस्ती सदन से बाहर निकाला गया। विपक्ष वाक आउट करता रहा, लेकिन सत्ता पक्ष ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
‘विपक्ष ने 62 विषयों पर 300 प्रश्नों के जवाब मांगे’
विपक्ष ने नियम 33 के अंतर्गत 62 विषयों पर लगभग 300 ज्वलंत प्रश्नों का जवाब मांगा। नियम 55 के तहत लोक महत्व के 13 विषयों पर विधानसभा अध्यक्ष को चर्चा के लिए नोटिस दिया। नियम 280 के तहत 50 महत्वपूर्ण विषय उठा, महत्वपूर्ण विषयों गैर सरकारी संकल्पों पर आधा दर्जन नोटिस भेजा।