न्यूनतम मजदूरी मामले पर सुप्रीम कोर्ट जाएगी दिल्ली सरकार
अधिकारियों के साथ बैठक के बाद श्रम मंत्री ने लिया निर्णय
गोपाल राय ने कहा, मजदूरों के हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । न्यूनतम मजदूरी को लेकर दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। सरकार के न्यूनतम वेतनमान संशोधन की संस्तुतियों को दिल्ली हाईकोर्ट के रोक के बाद यह निर्णय लिया गया। सोमवार को श्रम मंत्री गोपाल राय ने अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि वह मंगलवार को वकीलों के साथ इस पर बैठक करेंगे। मजदूरों के हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। रोटी, कपड़ा, मकान के साथ शिक्षा व ईंधन को भी न्यूनतम मजदूरी तय करने के फार्मूले में शामिल किया है।
गोपाल राय ने बताया कि अधिकारियों के साथ बैठक में न्यूनतम मजदूरी पर कोर्ट के फैसले पर चर्चा की गई। इसमें दो बातें सामने आईं। पहली यह कि अदालत ने फैसले को जल्दबाजी में लेने की बात कही है। दूसरी यह कि इसके लिए गठित कमेटी में फिक्की, एसोचैम, सीआईआई जैसे संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने पर आपत्ति जताई है। राय ने कहा कि दिल्ली सरकार ने न्यूनतम मजदूरी मामले वाले फैसला जल्दबाजी में नहीं किया। 8 अप्रैल 2016 को पहली बार कमेटी बनी। इस कमेटी ने इस मसले पर कुल आठ बैठक की। उपराज्यपाल की आपत्ति के बाद अगस्त 2016 में दोबारा कमेटी की बैठक हुई। कुल नौ बैठक और सब कमेटी बनाकर न्यूनतम मजदूरी तय किया गया। न्यूनतम मजदूरी को साढ़े नौ हजार से बढ़ाकर साढ़े तेरह हजार किया गया। तीन मार्च 2017 को अधिसूचना जारी की गई।
उन्होंने बताया कि 2010 में भी महंगाई भत्ता को रिवाइज किया गया था। उस समय जो कमेटी गठित हुई थी, उसमें भी यही एसोचैम, फिक्की जैसे संगठन कमेटी में शामिल थे। लेकिन उस समय किसी तरह का सवाल नहीं उठा। हमारी सरकार के संस्तुतियों पर ही आपत्ति हो रही है। केंद्र सरकार भी कई कमेटियों में इन संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करती है। हमारे फार्मूले पर हाईकोर्ट ने कोई सवाल नहीं उठाया है। इसलिए हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। 9 अगस्त को केंद्रीय मजदूर संगठन और दिल्ली के मजदूर संगठनों के साथ बैठक करेंगे। इस मुद्दे का प्रशासनिक हल भी निकालने की कोशिश जारी रहेगी।