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क्राइटेरिया बदले जाने के विरोध में छात्रों ने किया हंगामा

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क्राइटेरिया बदले जाने के विरोध में छात्रों ने किया हंगामा
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- इतिहास विभाग के एमफिल-पीएचडी के दाखिले के साक्षात्कार का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में एमफिल-पीएचडी के दाखिले के लिए साक्षात्कार में शामिल होने को लेकर क्राइटेरिया बदले जाने से नाराज छात्रों ने हंगामा किया। हंगामे के कारण पुलिस को भी बुलाना पड़ा। छात्रों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि पहले प्रवेश परीक्षा में पास होने पर कटऑफ को जारी किया गया था लेकिन साक्षात्कार से दो दिन पहले विभाग ने 50 फीसदी अंक होने का नया क्राइटेरिया जारी कर दिया। इससे कुल 130 में से केवल 19 छात्र ही साक्षात्कार के लिए योग्य पाए गए।
इस मामले में छात्रों की ओर से कुलपति को पत्र लिखा गया है और राहत की गुहार लगाई है। छात्रों का कहना है कि पूर्व में इतिहास विभाग में एमफिल व पीएचडी में दाखिले के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा में हर श्रेणी के लिए अलग-अलग अंक निर्धारित होते थे। छात्रों का कहना है कि नए नियम के कारण आरक्षित व अनारक्षित श्रेणी के छात्रों के लिए एक समान क्राइटेरिया घोषित कर दिया गया है। यह पूरी तरह से आरक्षण के नियमों के खिलाफ है।
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प्रवेश परीक्षा 200 अंक की थी। इस आधार पर साक्षात्कार में योग्य होने के लिए 100 अंक जरूरी कर दिए गए। प्रवेश परीक्षा में इस बार निगेटिव मार्किंग भी हुई। बताया जा रहा है कि डीयू में दाखिले के लिए एक बार जो नियम तय कर दिए जाते हैं, उन्हें बदला नहीं जाता है। छात्रों का कहना है कि 17 जुलाई को जो साक्षात्कार सूची जारी की गई उसमें सामान्य के लिए 78, ओबीसी के लिए 54, एससी के लिए 53 और एसटी के लिए 48 अंक घोषित किए गए थे। लेकिन 23 जुलाई को साक्षात्कार के दो दिन पहले ही नया क्राइटेरिया जारी कर दिया गया, जिसमें श्रेणियों के लिए 50 फीसदी अंक अनिवार्य कर दिए गए।
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