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जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर लगी रोक का हटना लोकतंत्र की जीत

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ंजंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर लगी रोक का हटना लोकतंत्र की जीत
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-सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दूसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचे प्रदर्शनकारी संगठन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर लगी एनजीटी की रोक हटने को प्रदर्शनकारी संगठनों ने लोकतंत्र की जीत बताया है। सुप्रीम कोर्ट के प्रदर्शनकारियों के हक में दिए गए फैसले के बाद से विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ा है। रोक हटने के दूसरे दिन मंगलवार को प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी इस जीत का जश्न मनाया, अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। हालांकि पुलिस की धरना-प्रदर्शन संबंधी गाइड लाइंस तैयार होने तक प्रदर्शनकारी अपनी आवाज को बुलंद करने की तैयारी में जुटे हैं।
वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर पिछले 1136 दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे सैन्य परिवार और पूर्व सैनिकों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया है। इस संगठन के सदस्य मंगलवार को भी जंतर-मंतर पहुंचे। इस मौके पर मेजर जनरल सतबीर सिंह ने कहा कि एनजीटी की रोक के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर करीब 8 महीने बाद उनके हक में फैसला आया तो उन्हें यकीन हो गया कि लोकतंत्र आज भी जिंदा है। वहीं सुदेश गोयत ने बताया कि जंतर-मंतर ही देश के लोगों की आवाज को उठाने का सबसे उचित स्थान है, चूंकि दिल्ली के बाहरी इलाकों में लोगों के प्रदर्शनों को प्रशासन देखता भी नहीं। इसी बीच संसद मार्ग पर स्थायी नौकरी की मांगों को लेकर देश भर से ऑल इंडिया रेडियो के कैजुअल एनांउसर भी पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी और स्थायी नौकरी की मांगे रखीं। इसी बीच प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर लगी रोक हटने से प्रदर्शनकारियों को अपनी आवाज उठाने का फिर से मौका मिला है।
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उधर, संसद मार्ग पर ऑल इंडिया एक्शन कमेटी फॉर बुद्धिस्ट लॉ संगठन ने अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। इस संगठन के प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके हक में ऐसा फैसला दिया, जो ऐतिहासिक है। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक मुकुंद खैरे ने कहा कि अब उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि उन्हें फिर से अभिव्यक्ति का अधिकार मिल गया है।
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