अब राजधानी के किसान खेतों में पैदा करेंगे बिजली
- प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री किसान आय बढ़ोत्तरी योजना को दी मंजूरी, कृषि भूमि पर लगेंगे सोलर पैनल
- किसानों को एक लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मिलेगा किराया, पीपीपी मॉडल से पूरी होगी योजना
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अब देश की राजधानी के किसान अपने अपनी फसल को नुकसान पहुंचाए खेतों में बिजली का पैदावार करेंगे। इसके तहत दिल्ली कैबिनेट ने मंगलवार को मुख्यमंत्री किसान आय बढ़ोत्तरी सोलर योजना को मंजूरी दे दी। केजरीवाल के मुताबिक, योजना के तहत खेतों में सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे फसल को कोई नुकसान नहीं होगा। ऊपर से किसानों को 25 साल तक किराया भी मिलेगा। इस योजना से प्रदेश सरकार को भी करोड़ोां का राजस्व लाभ मिलेगा। बैठक में शहीदों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की योजना को भी हरी झंडी दी गई है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चार साल में किसानों की आय दुगनी करने की बात रहे हैं। लेकिन दिल्ली सरकार अपने यहां के किसानों की आय तीन से चार गुनी करने जा रही है। यह काम मुख्यमंत्री किसान आय बढ़ोत्तरी सोलर योजना के तहत किया जाएगा। केजरीवाल के मुताबिक, योजना दिल्ली सरकार के ग्रीन बजट का हिस्सा है। इसके तहत कृषि योग्य भूमि पर तयशुदा ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। पैनल लगाने के काम निजी कंपनी करेगी। किसानों के साथ कंपनी 25 साल का समझौता करेगी। इसमें किसानों को अपनी भूमि का किराया मिलेगा और बिजली भी मुफ्त मिलेगी। वहीं, इस कदम से दिल्ली की आबोहवा सुधारने में सरकार को मदद मिलेगी। जबकि सस्ती बिजली मिलने से दिल्ली सरकार को 400-500 करोड़ रुपये का राजस्व बचेगा। केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि अगले आठ से नौ महीनों में किसानों को योजना का फायदा मिलने लगेगा।
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मुख्यमंत्री किसान आय बढ़ोत्तरी सोलर योजना
-किसानों को एक लाख प्रति एकड़ की रेट पर मिलेगा पैनल का किराया।
-किराए में हर साल 6 फीसदी का होगा इजाफा, 25 साल में किराया पहुंचेगा चार लाख रुपये।
-फिलहाल किसानों की एक एकड़ से 20-30 हजार की होती है कमाई, किराए से होगी अतिरिक्त आय।
-किसानों को हर एकड़ पर साल भर में मिलेगी 1000 यूनिट की मुफ्त बिजली।
-एक मेगावाट का सोलर प्लांट लगाने के लिये 6 एकड़ जमीन की होगी जरूरत।
-न्यूनतम 3.5 मीटर की ऊंचाई पर लगेंगे पैनल, ट्रैक्टर आदि कृषि उपकरणों को चलाने में नहीं होगी दिक्कत।
-जमीन के करीब एक तिहाई हिस्से में लगेगा पैनल, खेती नहीं होगी प्रभावित।
-किसानों को एक पैसा नहीं करना होगा निवेश, पीपीपी मॉडल पर निजी कंपनियां लगाएंगी पैनल।
-दिल्ली सरकार खरीदेगी बिजली, मौजूदा 9 रुपये प्रति यूनिट की जगह 4-5 रुपये प्रति यूनिट में मिलेगी बिजली।
- प्रदेश सरकार को 400-500 करोड़ रुपये की होगी बचत।