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ट्रकों के हड़ताल का असर रोजमर्रा की चीजों पर बेअसर दिखा

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ट्रकों की हड़ताल का असर
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रोजमर्रा की चीजों पर बेअसर
- मंडियों में आम दिनों की तरह ही माल लेकर पहुंच रहे हैं ट्रक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल भले ही पूरे देश में है, लेकिन हड़ताल के पांचवें दिन दिल्ली में ज्यादा असर नहीं दिखा। रोजमर्रा की चीजों को लेकर मंगलवार को भी ट्रक पहुंचे और मंडियों में व्यापार प्रभावित होता नहीं दिखा। हालांकि खाने-पीने के सामान को छोड़ दें तो अन्य व्यापारी वर्ग नुकसान की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि अन्य राज्यों से माल की आवाजाही नहीं हो पा रही है। इससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।
एशिया की सबसे बड़ी मंडी की बात करें तो आम दिनों की तरह मंगलवार को भी आलू, प्याज, टमाटर लेकर बड़ी संख्या में ट्रक अन्य प्रदेशों से पहुंचे। प्याज लेकर 71 से अधिक ट्रक और आलू लेकर 120 से अधिक ट्रक मंडी पहुंचे। उधर, नरेला अनाज मंडी में भी ट्रक आते-जाते रहे। लिहाजा हड़ताल का असर नहीं देखने को मिला। आजादपुर मंडी के व्यापारी अनिल मल्होत्रा ने बताया कि हड़ताल फेल हो गई है। हरी सब्जियों व टमाटर लेकर आम दिनों की तरह ही ट्रक पहुंचे। इतना जरूर है कि हिमाचल में बारिश के कारण टमाटर के पांच ट्रक कम आए तो मंगलूरू से भी ट्रकों की संख्या कम रही। सब्जियों की आवक में भी कमी नहीं रही। अन्य दिनों की तरह 400 ट्रक पहुंचे तो एनसीआर से सब्जियां लेकर छोटे ट्रक भी पहुंचे।
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हालांकि ट्रकों की हड़ताल से अन्य व्यापारी जरूर प्रभावित हो रहे हैं। गांधी बाजार रेडीमेड गारमेंट के व्यापारी बल्ली का कहना है कि ट्रकों की हड़ताल से बाजार की रौनक गायब है। अन्य प्रदेशों से जहां माल आने में परेशानी हो रही है, वहीं दूसरे प्रदेशों में माल भेजने के लिए ट्रांसपोर्टर माल की बुकिंग नहीं कर रहे हैं। टैंक रोड के व्यापारी रमेश आहूजा का कहना है कि व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। थोक बाजार में माल की आवाजाही ठप है।
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ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के दिल्ली-एनसीआर कमेटी के चेयरमैन त्रिलोचन सिंह ढिल्लो का कहना है कि हम अपनी मांगों पर अडिग हैं। भले ही अभी इसका असर ज्यादा नहीं दिख रहा है, लेकिन आने वाले समय में दिल्ली का व्यापार प्रभावित होगा। 10 हजार ट्रक न तो दिल्ली में आ रहे हैं और ना ही यहां से अन्य राज्यों में जा रहे हैं। हड़ताल से ड्राइवरों की रोजी-रोटी छिन गई है।
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