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जब बोल उठीं तस्वीरें, कैमरे की नजरों में कैद जीवन के अनमोल क्षण

Mon, 23 Jul 2018 04:57 PM IST
कुमार संजय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गांधी आर्ट गैलरी में इन दिनों तीन वरिष्ठ छायाकारों की फोटो प्रदर्शनी चल रही हैं। इसमें देश की ऐतिहासिक धरोहरों, परंपराओं और विभिन्न लोक शैली व वेशभूषा को नाना प्रकार की सतरंगी तस्वीरों के माध्यम से दर्शाया गया है। दिनेश पगारिया अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त फोटोग्राफर हैं। उनकी प्रशंसित कॉफी-टेबल पुस्तक का नाम है ‘लाइट एंड लाइफ’।
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उनके लेंस को प्रसिद्ध हस्तियों, ऐतिहासिक महलों और किलों, ऐतिहासिक मंदिरों, त्योहारों, घटनाओं, प्रकृति, वन्य जीवन के क्षण शूट करने का गौरव प्राप्त है। सन 1935 में मेरठ में जन्मे कैप्टन संतोष कुमार कहते हैं कि सिर्फ शटर दबा देना ही फोटोग्राफी नहीं है, बल्कि सतर्क निगाहें यानी विजन और टाइमिंग खासा महत्व रखते हैं। कैप्टन संतोष कुमार रक्षा मंत्रालय में वरिष्ठ फोटोग्राफिक अधिकारी रह चुके हैं।
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पेशेवर छायाकार के रूप में उन्होंने देश-विदेश की यात्राएं की हैं। वे पूर्वी गोलार्ध की प्रमुख संस्था अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफिक काउंसिल के संस्थापक सदस्य हैं। फोटो प्रदर्शक के रूप में कामयाबी के लिए उन्हें वर्ष 1988 में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान एआईआईपीसी से नवाजा गया था। 68 वर्षीय विमल एस. मेहता, दिल्ली आधारित फ्री लान्सिंग फोटोग्राफर और सिनेमा, फोटोग्राफी और कला के क्षेत्र में प्रसिद्ध नाम है। वह नागरिक फिल्म फोरम (सीएफएफ) के अग्रणी सदस्य होने के साथ ही इसके मानद सचिव भी हैं।
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