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दिल्ली में बारिश से अस्त-व्यस्त व्यवस्था पर राजनीति शुरु

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जलभराव में डूब गए सफाई के दावे
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क्या विधानसभा में पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने किया था नालों की सफाई का झूठा दावा
- भाजपा-कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू किया, विधायकों के सफाई न होने के तर्कों को किया था खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मॉनसून की पहली झमाझम बारिश से हुए जलभराव ने राजधानी के नालों की सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जलभराव के बाद नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप की सियासी बारिश शुरू हो गई है। भाजपा व कांग्रेस जलभराव के लिए दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। जून माह में आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने दावा किया था कि 30 जून तक सभी नालों की सफाई करा दी जाएगी। लेकिन लगभग आधी जुलाई में हुई बारिश से सारे दावे ध्वस्त हो गए। हालांकि, विधायकों ने इस पर स्पष्ट कर दिया था कि अभी काम ही शुरू नहीं हुआ तो काम पूरा कैसे हो गया।
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शुक्रवार को राजधानी का कनाट प्लेस सहित सभी कॉलोनियां व पॉश इलाके पानी से लबालब हो गए। यातायाम व्यवस्था ध्वस्त हो गई। अस्पताल तालाब में तब्दील हो गए। लेकिन पीडब्ल्यूडी का कोई कर्मचारी या अधिकारी नजर नहीं आया। उधर, राजनीतिक दलों ने समस्या का समाधान करने की बजाए एक दूसरे पर आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। दरअसल नालों की सफाई नहीं होने के कारण गाद भर गई है। पानी की निकासी न होने का खमियाजा दिल्लीवासियों को उठाना पड़ रहा है। 5 जून से शुरू तीन दिवसीय मानसून सत्र में नालों की सफाई का मुद्दा उठा था। अधिकांश विधायकों ने नालों की सफाई नहीं होने पर नाराजगी जताई लेकिन पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने लिखित जवाब में कहा कि काम जोरशोर से चल रहा है और 30 जून से पहले सभी नाले साफ करा दिए जाएंगे। आप के विधायकों ने जब मुद्दा उठाया कि जब काम शुरू ही नहीं हुआ है तो काम पूरा कैसे होगा। सरकार से असहयोग पर चल रहे अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी और उनके तर्क खारिज करते हुए उठकर चले गए। विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता सहित भाजपा के विधायक भी उपस्थित थे, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलना उचित नहीं समझा।
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