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हर साल करोड़ों की फीस देने के बाद भी जिले की अनाजमंडिय़ों में समस्याओं का अंबार

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रखरखाव के नाम पर हर साल लाखों रुपये की फीस वसूलने के बावजूद बुरा हाल
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जिले की अनाज मंडियों में समस्याओं का अंबार
अमर उजाला ब्यूरो
नूंह। जिले की अनाज मंडियों के रखरखाव के नाम पर भले ही हर साल लाखों रुपये खर्च होते हों, लेकिन यहां समस्याओं का अंबार है। प्रशासन और संबंधित विभाग की अनदेखी के कारण यहां किसान, आढ़ती और मजदूर आए दिन समस्याओं से दो-चार हो रहे हैं। लेकिन फिर भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जिले में नूंह, फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना व तावडू में अनाजमंडी हैं। इनमें बिजली, पानी, सीवरेज की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। नूंह में तो पिछले वर्ष एक करोड़ रुपये का टेंडर छोड़ काम शुरू कराया गया था। लेकिन आज तक ठेकेदार ने काम पूरा नहीं किया। आढ़ती कई बार सीवरलाइन चालू करने के लिए संबंधित अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन यहां पानी की भी समस्या पर काम नहीं हुआ है। जिले की किसी भी अनाजमंडी में पशुताड़क नहीं है। ऐसे में किसान व आढ़तियों की फसलों को लावारिस पशु खराब करते हैं। मंडियों में बने सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति दयनीय है। जिसके कारण यहां काम करने वाले मजदूरों को खुले में शौच करना पड़ता है। इतना ही नहीं सभी मंडियों में पानी की कमी होने के कारण मोल पानी मंगाकर पीना पड़ता है।
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पुन्हाना मंडी के प्रधान मंगत राम का कहना है कि मार्केट कमेटी के अधिकारियों को यहां की समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है। यहां कई समस्याएं हैं। नूंह मंडी के प्रधान गिर्राज गोयल का कहना है कि ठेकेदार ने नूंह अनाजमंडी में सड़क, सीवरेज व पानी की पाइप लाइन के अलावा पानी निकासी का ठेका करोड़ों रुपये में लिया था, लेकिन आज तक काम पूरा नहीं हुआ है। संबंधित अधिकारियों से भी कह चुके हैं। सूरज खुराना का कहना है कि पशुओं ने मंडी में जीना मुहाल किया हुआ है। सीवरेज खुले पड़े हैं, जिसमें आए दिन जीव-जंतु गिर रहे हैं। यहां टीन शेड की भी जरूरत है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। तावडू मंडी से महेंद्र का कहना है कि मंडी में जो सुविधाएं मिलनी चाहिए वो नहीं हैं। इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अधिकारियों का कब्जा
सभी मंडियों में किसानों के आराम के लिए किसान रेस्ट हाउस बने हुए हैं, लेकिन इन सब पर अधिकारियों व कर्मचारियों का कब्जा है। बार-बार कहने के बाद भी इस ओर प्रशासन ने आज तक कोई ध्यान नहीं दिया। जिले के सभी रेस्ट हाउस अधिकारियों की शरणस्थली बने हुए हैं।
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मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं था। जहां जो भी दिक्कतें हैं, संबंधित कार्यकारी अभियंता से बात कर उन्हें दूर कराया जाएगा। निश्चित तौर पर समस्याओं का निदान होना चाहिए। नूंह में काम पूरा क्यों नहीं हुआ है, इस बारे में पता कर आगामी कार्रवाई की जाएगी। - पकंज कुमार, डीसी
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