हर छठा भारतीय जोड़ों के दर्द से परेशान
58 प्रतिशत महिलाएं भी पीड़ित, युवाओं को भी चपेट में ले रही बीमारी
कैल्शियम की कमी प्रमुख कारण, उचित खानपान के अभाव में बढ़ रही समस्या
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। आज हर छठा भारतीय जोड़ों के दर्द से परेशान है। 58 प्रतिशत महिलाएं भी इस दर्द को झेल रही हैं। खास बात यह है कि अब यह बीमारी 20 से 25 साल के युवाओं को भी चपेट में ले रही है। इलाज के लिये मरीज एलोपैथिक और आयुर्वेद चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। आज विश्व गठिया दिवस है। शहर में कई जगहों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। जीवा आयुर्वेद के डायरेक्टर डॉक्टर प्रताप चौहान ने कहा कि जोड़ों से संबंधित परेशानियां बहुत बढ़ गई हैं। उत्तर प्रदेश में लखनऊ से सबसे ज्यादा मरीज इलाज को पहुंचे। दूसरे नंबर पर गाजियाबाद, तीसरे पर मेरठ, चौथे पर इलाहाबाद और पांचवें नंबर पर कानपुर है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा की बात करें तो यहां से 650 मरीज इलाज कराने पहुंचे। आर्थराइटिस की विशेष चिकित्सा, आहार व जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ उचित औषधियों द्वारा की जा सकती है। उपचार शुरू होने के कुछ ही माह में मरीज को दर्द, सूजन, जकड़न और गतिविधि संबंधी परेशानियों में काफी आराम हो जाता है। फोर्टिस अस्पताल के ज्वाइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक डॉ. अतुल मिश्रा ने बताया कि भारत में 15 करोड़ से अधिक लोग घुटने की समस्या से पीड़ित हैं। 4 करोड़ लोगों को घुटना बदलवाने की आवश्यकता है। एक अनुमान के अनुसार, देश में हर छह में एक व्यक्ति आर्थराइटिस से पीड़ित है।
पुरुषों से ज्यादा महिलाएं ग्रसित
पुरुषों की तुलना में महिलाओं के घुटने जल्दी खराब होते हैं। भारतीय महिलाओं में घुटने की समस्याओं की शुरुआत की औसत उम्र 50 साल हैं, जबकि पुरुषों में यह 60 साल है। महिलाओं में इस समस्या का कारण मोटापा, व्यायाम नहीं करना, धूप में कम रहना और खराब पोषण है। करीब 90 प्रतिशत महिलाओं में विटामिन डी की कमी है। जंक और फास्ट फूड के बढ़ते इस्तेमाल तथा खान पान की गलत आदतों के कारण हड्डियों को कैल्शियम एवं जरूरी खनिज नहीं मिल पा रहे हैं। लगभग 30 प्रतिशत रोगी 45 से 50 साल के हैं, जबकि 18 से 20 प्रतिशत 35 से 45 साल के हैं।
बचाव
पैर मोड़कर बैठने से बचें
भारतीय शौचालयों का उपयोग जहां तक हो सके कम करे।
लंबे समय तक खड़े होने से बचें।
घुटने के व्यायाम, साइकिल चलाना, तैराकी करें