बेलगाम भारी वाहन जाम से जूझ रही शहर की सड़कों के लिए मुसीबत बन गए हैं। दिल्ली, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद सहित देश के ज्यादातर शहरों में भारी वाहनों के लिए पीक टाइम में नो एंट्री का नियम सख्ती से लागू है, लेकिन नोएडा ऐसा शहर है जहां भारी वाहनों के लिए नो एंट्री का नियम तो बना लेकिन यातायात पुलिस उसे लागू करना भूल गई है। नतीजतन, शहर की सड़कों पर 24 घंटे भारी वाहनों से खतरा मंडरा रहा है। जिला पुलिस की रिपोर्ट इस बात की तस्दीक कर रही है। वर्ष 2017 में भारी वाहनों से 99 हादसे हुए जिनमें 59 लोगों ने जान गंवाई।
एनसीआर के दूसरे शहरों की तुलना में नोएडा के लचर नियम भारी वाहनों से होने वाले हादसों की सबसे बड़ी वजह हैं। डेथ वारंट लिए शहर की सड़कों पर दौड़ रहे भारी वाहन हर सप्ताह औसतन दो से तीन जान ले लेते हैं। भारी वाहनों के संचालन से शहर की व्यस्त सड़कों पर जाम की समस्या बढ़ने के साथ-साथ हादसों का खतरा भी बढ़ता ही जा रहा है। नवंबर 2014 में दिल्ली-एनसीआर के अन्य शहरों की तर्ज पर पीक टाइम में भारी वाहनों की शहर के मुख्य मार्गों पर नो एंट्री का नियम लागू किया गया था। निगरानी के अभाव में नियम कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं। नोएडा को दिल्ली से जोड़ने वाला ओखला बैराज हो गया फिर एनएच-24 और दिल्ली-नोएडा लिंक रोड। बेलगाम भारी वाहनों से जाम की समस्या को बढ़ा दिया है।
परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में करीब 8 हजार से ज्यादा भारी वाहन रजिस्टर्ड हैं। वहीं पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक नोएडा से रजिस्टर्ड भारी वाहनों से ज्यादा हरियाणा और राजस्थान के भारी वाहन सड़कों पर कोहराम मचा रहे हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित मार्ग
एमपी-1 मार्ग - डीएनडी से सेक्टर 12/22 तिराहा
एमपी-2 मार्ग - फिल्मसिटी से सेक्टर 60 तिराहा
एमपी-3 मार्ग - कालिंदी कुं ज से मॉडल टाउन मार्ग
किस वाहन से कितने हादसे
वाहन हादसे
ऑटो रिक्शा 88
कार, टैक्सी 242
बस 76
ट्रक, लॉरी 99
टैंपो, ट्रैक्टर 70