शामली। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के तहत जिले के 53 गांवों के सीमा विस्तार से पहले ही इन गांवों में जिला पंचायत ने आनन-फानन में 129 कॉलोनियां परमिशन देकर कटवा दी।
प्रशासनिक अधिकारियों की जांच में सामने आया है कि जिला पंचायत ने विकास प्राधिकरण से भी एनओसी लेना मुनासिब नहीं समझा। यही नहीं, कम रेट पर 100 रुपये स्क्वायर मीटर के हिसाब से कॉलोनी काटने की अनुमति दी गई जबकि 1200 रुपये स्क्वायर मीटर के हिसाब से लिए जाते तो सरकार को भी राजस्व का फायदा होता।
डीएम के निर्देश पर एडीएम परमानंद झा ने पूरे मामले की जांच की। जिसमें सामने आया है कि आनन-फानन में काटी गई कॉलोनियो के कारण सरकार को भी चूना लगा है।
शामली जिला मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आता है। प्राधिकरण ने जिले के 53 गांवों को प्राधिकरण की सीमा में शामिल करने के लिए वर्ष 2021 में शासन को प्रस्ताव भेज दिया था। शासन में ही प्रस्ताव लंबित है। अभी सीमा विस्तार नहीं किया गया है।
कुछ लोगों ने जिलाधिकारी अरविंद चौहान से शिकायत की कि जिन 53 गांवों में सीमा विस्तार होना है, उनमें आनन-फानन में काफी संख्या में कॉलोनियां गलत तरीके से काट दी गई है, जिनमें कुछ कॉलोनियां अवैध भी है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच एडीएम परमानंद झा को सौंपी थी।
एडीएम ने मामले की जांच की तो मुंडेट, बधेव, कन्नूखेड़ा, खेड़ीकरमू, टिटौली, लिलौन, बनता, गोहरनी, भैंसवाल, महरमपुर, बलवा, बंतीखेड़ा, झाल, हरड़ फतेहपुर आदि गांवों में 129 कॉलोनियां जिला पंचायत द्वारा परमिशन देकर काटी गई है, जिन पर निर्माण कार्य चल रहा था।
जांच में सामने आया है कि उक्त कॉलोनियों को वर्ष 2021 से लेकर अक्तूबर 2024 तक विभिन्न प्रोपर्टी डीलरों ने काटा है। जिनसे जिला पंचायत ने 100 रुपये स्क्वायर मीटर के हिसाब से नक्शे पास पर कॉलोनियां कटवाई है।
जबकि सीमा विस्तार में शामिल होने के बाद यदि यहां पर कॉलोनियां काटी जाती तो 1200 रुपये स्क्वायर मीटर के हिसाब से परमिशन दी जाती। जिससे सरकार की झोली भी भरती। इसमें मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण से भी जिला पंचायत ने एनओसी लेना मुनासिब नहीं समझा।
nअब कैराना, कांधला क्षेत्र में होगी जांच : प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि शामली के बाद अब कैराना, कांधला क्षेत्र के विभिन्न गांवों में भी काटी गई कॉलोनियों को लेकर जांच की जाएगी। जिसके लिए अधिकारियों ने तैयारी कर ली है। अलग से टीम गठित की जा रही है।
nडेवलपमेंट, विकास शुल्क करना होता है जमा : कॉलोनी काटने के लिए मालिक को विकास शुल्क, डेवलपमेंट का बाहरी और अंदरूनी चार्ज एमडीए या फिर जिला पंचायत को देना होता है। नक्शे पास होने और एनओसी जारी होने के बाद ही काॅलोनियों में निर्माण कार्य शुरू कराया जाता है। संवाद