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कैबिनेट मंत्री राव नरबीर की शैक्षणिक डिग्री संदेह के घेरे में
-आरटीआई कार्यकर्ता समूह ‘अधिकार’ ने प्रेसवार्ता कर लगाया फर्जी होने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह पर फर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री लेने का आरोप लगा है। आरटीआई कार्यकर्ताओं के समूह ‘अधिकार’ ने शुक्रवार को डीएलएफ फेज-1 में प्रेसवार्ता कर मंत्री द्वारा साल 2005, 2009 और 2014 के चुनाव के शपथपत्र में झूठी जानकारी देने और गलत शैक्षणिक प्रमाण पत्र लेने का आरोप लगाया। आरोप है कि राव नरबीर की हिंदी विश्वविद्यालय, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से ली गई हिंदी साहित्य में स्नातक की डिग्री वैध नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ता ने मंत्री की केंद्रीय चुनाव आयोग से सदस्यता खत्म करने की शिकायत की है। साथ ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल से उन्हें कैबिनेट से हटाने, मंत्री रहते हुए लिए गए सभी निर्णय निरस्त करने की मांग की है।
आरटीआई कार्यकर्ता हरिंद्र ढींगरा का कहना है कि मई 2017 में कैबिनेट मंत्री की शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मांगी गई थी। लंबी प्रक्रिया के बाद एक दिसंबर 2018 को तमाम दस्तावेज मिले। बकौल ढींगरा, राव नरबीर द्वारा 2005 में रेवाड़ी के जाटुसाना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के वक्त दिए गए हलफनामा के मुताबिक, उन्होंने 1976 में माध्यमिक शिक्षा परिषद् इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) से मैट्रिक की। जबकि 1986 में हिंदी साहित्य में हिंदी विश्वविद्यालय, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से स्नातक किया। जबकि 2014 में बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के दौरान दिए गए शपथपत्र में स्नातक वर्ष 1987 बताया गया।
ढींगरा ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में राजस्थान प्रदेश बनाम सरदार शहर एवं अन्य की सुनवाई करते हुए कहा था कि हिंदी साहित्य सम्मेलन को विश्वविद्यालय या शिक्षण बोर्ड की मान्यता नहीं है। 1967 के बाद किसी स्वायत्त संस्था से मान्यता नहीं मिली है। इससे पहले 1997 में राम भगत शर्मा बनाम हरियाणा राज्य के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने साफ किया था कि विश्वविद्यालय अमान्य है और इससे डिग्री लेकर सरकारी नौकरी में कार्यरत लोगों को हटाया जाए। वहीं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने आरटीआई में बताया कि हिंदी विश्वविद्यालय के नाम से कोई विश्वविद्यालय उनकी सूची में नहीं है।
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लोकनिर्माण मंत्री राव नरबीर ने ट्वीट कर कहा कि आरटीआई कार्यकर्ता हरींद्र ढींगरा ने मेरे शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को फर्जी होने का जो आरोप लगाय है, वह निराधार है। मेरे सभी प्रमाण पत्र सही हैं। यह विरोधियों की राजनीतिक साजिश हैं। मैं जल्द ही ढींगरा के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करूंगा।