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हेडिंग: 10 वर्ष में शिकारियों का निशाना बने 384 बाघ
आरटीआई से खुलासा, देश में 961 शिकारियों को किया जा चुका है गिरफ्तार
कितनों को सजा हुई इसकी जानकारी वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के पास नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। देश में बाघों की संख्या को लेकर चिंता जाहिर की जाती रही है, लेकिन इनके संरक्षण को लेकर एक दशक में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं। इस बात की तस्दीक वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने एक आरटीआई के जवाब में दी है। इसके मुताबिक, 10 वर्ष में देश में 384 बाघ शिकारियों का निशाना बने हैं। हालांकि, 961 शिकारियों की गिरफ्तारी भी की गई लेकिन इनमें से कितनों को सजा हुई, यह जानकारी ब्यूरो के पास उपलब्ध नहीं है।
नोएडा निवासी समाजसेवी अधिवक्ता रंजन तोमर ने ब्यूरो में आरटीआई लगाकर दस वर्ष में शिकार के दौरान बाघों की मौत की संख्या और इसमें गिरफ्तारियों की संख्या मांगी थी। रंजन तोमर का कहना है कि आरटीआई में दिए गए जवाब से स्पष्ट है कि सरकार चाहे पिछली रही हो या मौजूदा, दोनों ही बाघों के संरक्षण में कामयाब नहीं हुई हैं। बाघों के संरक्षण के लिए कानून में बदलाव कर उसे प्रभावी बनाया जाना और विशेष अभियान चलाया जाना अति आवश्यक है। ऐसा नहीं किया गया तो वो दिन दूर नहीं जब मनुष्य भी पृथ्वी से विलुप्त हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर जब मॉरीशस में डोडो प्रजाति विलुप्त हो गई तो बादाम के पेड़ की एक प्रजाति ने भी पुन: उत्पन्न होने की शक्ति खो दी। जब एक प्रजाति विलुप्त होती है तो यह एक निशान छोड़ जाती है, जो पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है।