मां के मातृत्व ने दी जीवन को परिभाषा, सिखाया जीने का अंदाज
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। हर इंसान के जीवन में मां की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मां से मिले संस्कार, उसकी परवरिश और स्नेह से ही व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ पाता है। मां के महत्व को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। बच्चे की परवरिश में माता-पिता दोनों का ही योगदान होता है। लेकिन किसी कारणवश पिता का साथ ना हो तो बच्चे की परवरिश मां के लिए चुनौती बन जाती है। लेकिन ऐसी कठिन परिस्थितियों में बच्चे का भविष्य सुधारने में मां का योगदान अहम रहता है। हमने शहर की कुछ ऐसी माताओं से बात की, जिन्होंने अकेले ही अपने बच्चे की परवरिश की है।
पति की मौत के बाद संभाली दोहरी जिम्मेदारी
मेरे पति कानपुर में कस्टम विभाग में नौकरी करते थे। हमारी ढाई साल की बच्ची थी। उस वक्त मेरे पति की सड़क हादसे में मौत हो गई। ऐसे में बेटी त्रिशा की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। बेटी को संभालने और बेहतर शिक्षा देने की चुनौती सामने थी। बताया कि पति की सरकारी नौकरी थी, तो नियमानुसार मुझे उनकी जगह नौकरी मिलनी चाहिए। इसके लिए मैंने विभाग में आवेदन किया। लेकिन नौकरी मिलने में करीब तीन साल का वक्त लगा। इस दौरान 2005 में बेटी को लेकर में नोएडा में रहने लगी। 2006 में मुझे पति की जगह नौकरी पर रखा गया। इसके बाद बच्ची का दाखिला रेयान स्कूल में करवाया और उसकी शिक्षा पर ध्यान देना शुरू किया। हाल ही में बेटी ने अच्छे नंबरों से 12वीं की परीक्षा पास की है। मेरी कोशिश है कि उसे हर खुशी और बेहतर जीवन दूं।
- पूनम शुक्ला
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बच्चे के परवरिश के लिए पार की हर बाधा
मैंने इंटर कास्ट मैरिज की थी, लेकिन मेरे घरवालों ने मुझे पूरा सहयोग किया। शादी के कुछ समय बाद हमारे रिश्ते में परेशानी आने लगी। मैं रियल एस्टेट में नौकरी करती थी। शादी के बाद नौकरी और पारिवारिक तनाव आदि के बीच मेरा गर्भपात हो गया। बच्चे को खोना बहुत बड़ी तकलीफ थी। चार साल बाद बेटे आर्यन का जन्म हुआ। इस दौरान पति से रिश्ते पूरी तरह बिगड़ चुके थे और बच्चे की जिम्मेदारी अकेले उठानी पड़ रही थी। मैंने पति से अलग होने का फैसला लिया। तलाक के बाद बच्चे की पढ़ाई के लिए नौकरी जारी रखना बेहद जरूरी था। एक साथ बच्चे और जॉब को संभालना भी आसान नहीं था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। फिलहाल बेटा तीसरी कक्षा में है। पढ़ने से लेकर खेलकूद में भी एक्टिव है। कोशिश है कि वह बेहतर और सफल इंसान बने।
- आसमां जावेद
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मां व्यक्ति के जीवन में सबसे अहम भूमिका रखती है। वही बच्चे की पहली शिक्षिका होती है। व्यक्तित्व और नैतिक मूल्यों का निर्माण करती है। अच्छे और बुरे में फर्क बताकर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा देती है।
- बीएन सिंह, जिलाधिकारी
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मां ने मेरे जीवन को बेहतर बनाने में बेहद योगदान दिया है। मैं जो भी हूं, मेरी मां के कठिन परिश्रम की वजह से हूं। उन्होंने हमेशा अच्छे संस्कार देकर मुझे आगे बढ़ने को प्रेरित किया।
- एके पांडे ( एआरटीओ )
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मां का महत्व जीवन में सबसे अधिक है। संस्कार और परवरिश ही इंसान की सफलता के सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं। मेरी मां से मुझे हमेशा प्रेरणा मिली है।
- आशुतोष निरंजन, एमडी, यूपीपीसीएल