लोकतंत्र के इस महापर्व में विकास और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतदान हुआ।
जातिवाद को दरकिनार करते हुए नोएडा के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के मुद्दे को सबसे ऊपर रखा गया। इसके साथ सुरक्षा और रोजगार जैसे मामलों को भी प्राथमिकता मिली। नोएडा के गांवों में लगभग 80 प्रतिशत मतदान हुआ जबकि कुछ गांवों में यह आंकड़ा 85 से 90 फीसदी तक पहुंचा।
ब्राह्मण, गुर्जर, ठाकुर, मुस्लिम और दलित जैसे मुद्दों के आधार पर अक्सर राजनीतिक पार्टियां उम्मीदवार निर्धारित करती हैं, लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव में पहली बार जातिवाद का मुद्दा मतदान पर हावी होता नजर नहीं आया।
ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि लोकसभा और विधानसभा अलग-अलग चुनाव हैं। दोनों को एक साथ मिलाकर तरक्की नहीं पाई जा सकती।
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इसके अलावा गुर्जर बहुल गांवों में विकास को प्राथमिकता दी गई, जबकि ठाकुरों के गांवों में विकास के साथ सुरक्षा और आत्म सम्मान भी एक मुद्दा रहा। दूसरी ओर मुस्लिम बहुल क्षेत्र के गांव में रोजगार बड़ा मुद्दा रहा।
मुस्लिम मतदाताओं का मनाना है कि रोजगार होगा तो उनकी आने वाली पीढ़ी नए मुकाम को छू पाएगी। इसके साथ शिक्षा व्यवस्था पर भी इनका रुझान देखने को मिला।
एक्सप्रेसवे से जुड़े गांव छपरौली, नगला-नगली, नगला वाजिदपुर, नगला साखपुर, मोइयापुर, गुलावली, झट्टा, फेस टू के ककराला, गेझा, सोरखा, सर्फाबाद और होशियारपुर गांव में औसतन 80 फीसदी मतदान का दावा किया गया।