मामले की जानकारी जब अधिवक्ता बलराज भाटी को लगी तो उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह से इसकी शिकायत कर दी। वहीं, सोमवार को जब रजिस्ट्रेशन के लिए फाइल परिवहन विभाग के कार्यालय पहुंची तो अधिकारी भी सकते में आ गए। इतनी कम राशि पर नंबर बिकने से विभाग को करीब 5 लाख 14 हजार 500 रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
प्रक्रिया में बदलाव की मांग
शहर निवासी गजेंद्र सिंह खारी ने एक पत्र परिवहन विभाग को भेजकर प्रक्रिया को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि उनको एक सामान्य सा नंबर नहीं मिल पाया और कुछ लोग गलत नीति का लाभ उठाकर वीआईपी नंबर को मात्र 35,500 रुपये में ले जाते हैं। इसलिए इस प्रक्रिया में बदलाव किया जाना चाहिए।
इन सुझावों पर अधिकारी करें गौर
- नीलामी में भाग लेने वाले लोगों से बोली की एक चौथाई रकम तुरंत जमा कराई जाए।
- बोली लगाने वाला व्यक्ति यदि दूसरे को लाभ पहुंचाने के लिए पीछे हटता है तो उसकी रकम जब्त हो।
- नीलामी में सबसे अधिक बोली लगाने वाले को नंबर दे दिया जाए, बाकी के पैसे लौटाए जाएं।
- नीलामी में शामिल होने वाले व्यक्ति की जमानत राशि 50 हजार से एक लाख रुपये की जाए।
- इस तरह की घटना की पुर्नावृत्ति होती है तो दोबारा नंबर की नीलामी कराई जाए।
क्या कहते हैं अधिकारी
परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश में पहली बार नंबरों की निलामी प्रक्रिया गौतमबुद्धनगर और लखनऊ में शुरू की गई है। इस बार 0001 को लेकर कुछ गड़बड़ी महसूस हुई है। इसकी जानकारी शासन में दे दी गई है और उम्मीद है जल्द ही इसमें कुछ सुधार किया जाएगा। संभावना है कि बोली लगाने वाले लोगों की रकम बढ़वाई जाएगी।
- एके पांडेय, एआरटीओ प्रशासन गौतमबुद्धनगर