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Delhi NCR News: नोएडा में सजेगा कुन बोकाटोर का अखाड़ा, 100 खिलाड़ी दिखाएंगे दमखम

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- 1 नवंबर को रामाज्ञा स्कूल में होगी तीसरी उत्तर प्रदेश कुन बोकाटोर चैंपियनशिप
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- विजेता खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में करेंगे उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व



नितेश कुमार



ग्रेटर नोएडा। कंबोडिया की प्राचीन युद्ध कला कुन बोकाटोर का रोमांच एक नवंबर को नोएडा में देखने को मिलेगा। उत्तर प्रदेश कुन बोकाटोर चैंपियनशिप के तीसरे सीजन की मेजबानी इस बार गौतमबुद्ध नगर को मिली है। सेक्टर-50 स्थित रामाज्ञा स्कूल परिसर में होने वाली इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर के करीब 100 खिलाड़ी अपनी ताकत, तकनीक और मार्शल आर्ट कौशल का प्रदर्शन करेंगे। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।
उत्तर प्रदेश कुन बोकाटोर एसोसिएशन और जिला कुन बोकाटोर एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली इस चैंपियनशिप में जिले के लगभग 20 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। अलग-अलग वर्गों में होने वाले मुकाबलों में खिलाड़ियों की तकनीक, फुर्ती, संतुलन और प्रदर्शन के आधार पर विजेताओं का चयन किया जाएगा। जिला कुन बोकाटोर एसोसिएशन के संस्थापक एवं महासचिव जफर खान ने बताया कि प्रतियोगिता के जरिए युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने के साथ बड़े मंच पर पहचान बनाने का अवसर मिलेगा।
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अंतरराष्ट्रीय पदाधिकारी बढ़ाएंगे खिलाड़ियों का हौसला
चैंपियनशिप में अंतरराष्ट्रीय कुन बोकाटोर फेडरेशन (आईकेएलएफ) के उपाध्यक्ष, मध्य पूर्व कुन बोकाटोर फेडरेशन के अध्यक्ष और ईरान कुन बोकाटोर फेडरेशन के अध्यक्ष सैयद रजा मौसवी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनकी मौजूदगी से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ने और उन्हें इस पारंपरिक खेल की अंतरराष्ट्रीय संभावनाओं से परिचित होने का अवसर मिलने की उम्मीद है।
मुक्के, लात और पकड़ने की तकनीक है खासियत
कुन बोकाटोर कंबोडिया की प्राचीन पारंपरिक मार्शल आर्ट है, जिसकी जड़ें खमेर सभ्यता से जुड़ी हैं। इसमें मुक्के, लात, घुटने और कोहनी से प्रहार करने के साथ प्रतिद्वंद्वी को गिराने, पकड़ने, जोड़ लॉक करने और चोक करने जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इस कला में ताकत के साथ फुर्ती, संतुलन और तकनीकी दक्षता भी महत्वपूर्ण होती है।
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खास पहचान है क्रैमा
इस खेल की एक खास पहचान खिलाड़ियों की कमर पर बंधा पारंपरिक स्कार्फ है, जिसे ‘क्रैमा’ कहा जाता है। इसके अलग-अलग रंग खिलाड़ियों के कौशल और स्तर को दर्शाते हैं। सफेद, हरे, नीले, लाल, भूरे और काले रंग के क्रैमा के माध्यम से खिलाड़ियों की रैंक पहचानी जाती है।
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