नोएडा के जिला अस्पताल में नौ फरवरी को समोसे खाने से बीमार पड़े स्टाफ के 17 लोगों के मामले में जांच का खेल ही निराला चल रहा है। खास बात यह है कि समोसे खाने से बीमार पड़े लोगों की जांच के मामले में राजकीय खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला भेजे गए सैंपलों में समोसे का सैंपल ही नहीं था।
इसमें केवल दुकान में उपयोग होने वाले खाद्य तेल और रसगुल्ले जैसे अन्य पदार्थों का सैंपल लिया गया था। घटना वाले दिन सुबह ग्यारह बजे की घटना के बाद खाद्य सुरक्षा निरीक्षक नोएडा एसएन सिंह ने जब ढाई बजे समोसे बनाने वाली दुकान पहुंचे थे तब तक दुकानदार ने वहां से समोसे कहीं अन्यत्र ही फिकवा दिए थे।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा निठारी में अग्रवाल फूड प्वाइंट से सैंपल लिए गए थे। इसके बाद जांच के लिए सैंपल राजकीय खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला भेजे गए थे।
समोसे खा बीमार पड़े स्टाफ की नहीं आई सैंपल रिपोर्ट
इसके बाद जांच के लिए सैंपल राजकीय खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला भेजे गए थे। इसमें केवल दुकान में उपयोग होने वाले खाद्य तेल और रसगुल्ले जैसे अन्य पदार्थों का सैंपल लिया गया था।
हालांकि, एक माह बीतने के बाद भी अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। इस बारे में जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि जांच के लिए गए सैंपलों में जब समोसे गए ही नहीं तो रिपोर्ट कितनी पॉजिटिव आएगी इस पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
क्या है नोएडा के 'समोसे' का पूरा मामला?
नौ फरवरी को सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में वार्ड आया उर्मिला ने दादी बनने की खुशी में सुबह साढ़े दस बजे सेक्टर-31 स्थित अग्रवाल फूड प्वाइंट से समोसे और छेने मंगवाए थे।
समोसा खाने के कुछ देर बाद से डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ को उल्टी, चक्कर आना, जीभ टेढ़ी होने के साथ चेहरा नीला पड़ने लगा था। एक साथ करीब 17 लोगों की हालत बिगड़ती देख अस्पताल में कोहराम मच गया था। देरी न करते हुए डाक्टरों की टीम ने गाइनी डाक्टर समेत सभी पैरामेडिकल स्टाफ को भर्ती किया।
जिला अस्पताल स्टाफ ने अलग भेजी थी रिपोर्ट
घटना के फौरन बाद जिला अस्पताल की ओर से सेक्टर-20 थाने को शिकायत दी गई थी। घटना के समय इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. ब्रजेश ने बताया कि समोसे के सैंपल को सीलबंद कर सेक्टर-20 थाना पुलिस को सौंपे गए थे।
दूसरी तरफ, सेक्टर-20 थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की लिखित शिकायत पुलिस को नहीं मिली है।
सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई थी जांच
घटना के दौरान जिलाधिकारी हीरा लाल गुप्ता ने सिटी मजिस्ट्रेट एससी शुक्ला को मामले की जांच करने के लिए बोला था।
डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट के बदलने के बाद वर्तमान में नए सिटी मजिस्ट्रेट केपी सिंह ने बताया कि मामला उनके सज्ञान में है। इसके बारे में रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।