अब जिला प्रशासन ने गर्भवती की मौत मामले में बरती गई लापरवाही सार्वजनिक की है। जांच आख्या में सर्वाधिक खराब रवैया ईएसआई अस्पताल के स्टाफ और अफसरों का सामने आया है।
रिपोर्ट में लिखा है कि सेक्टर-24 स्थित ईएसआई अस्पताल में सारी सुविधाएं व वेंटिलेटर की उपलब्धता के बावजूद नीलम का इलाज न कर जिम्स रेफर कर एंबुलेंस से जिला अस्पताल के बाहर ही छोड़ दिया गया।
जिला अस्पताल के किसी अफसर-कर्मचारी से रिसीव तक नहीं कराया। डीएम ने अस्पताल के निदेशक, इलाज व रेफर करने वाले चिकित्सक, एंबुलेंस कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश के लिए प्रमुख सचिव श्रम उत्तर प्रदेश शासन, सचिव श्रम भारत सरकार, डीजी राज्य कर्मचारी जीवन बीमा निगम से की है।
वहीं, जिला अस्पताल की जांच में सामने आया है कि यदि मरीज वहां इलाज नहीं करा सकता था तो उसकी जिम्मेदारी संविदा कर्मी पर न होकर किसी जिम्मेदार अफसर पर होनी थी। उन कर्मचारियों ने अफसरों को बिना बताए ही मरीज को वापस भेज दिया। इसके अलावा अन्य कई मामले भी सीएमएस के गले की फांस बने हैं।
जिलाधिकारी ने सभी को आधार बनाते हुए प्रमुख सचिव स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश को सीएमएस का तबादला अन्य स्थान पर करने केलिए लिख दिया है। साथ ही, जांच में गाजियाबाद के निजी अस्पताल की लापरवाही भी सामने आई है। इसके खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी ने गाजियाबाद के डीएम को लिखा है।
डीएम ने रिपोर्ट में लिखा है कि विभिन्न निजी अस्पतालों में जाने के बावजूद वहां बेड उपलब्ध न होने का बहाना बना मरीज को वापस भेज दिया गया। इस कारण समय पर इलाज न मिलने से गर्भवती की मौत हो गई। जांच में निजी अस्पतालों में तैनात अफसर-कर्मचारी को दोषी माना है।
रिपोर्ट के आधार पर ही डीएम ने सीएमओ को अग्रिम कार्रवाई के लिए लिखा है कि सभी अस्पतालों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार चिकित्सीय तकनीकी समिति गठित की जाए। उसी में जांच के आधार पर अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो।
जिम्स के निदेशक करेंगे कार्रवाई
जांच में जिम्स की लापरवाही भी सामने आई है, लेकिन यहां डीएम ने शासन को किसी के खिलाफ कार्रवाई के लिए नहीं लिखा है। डीएम ने लिखा है कि जिम्स में पहली बार मरीज को वापस कर दिया। बाद में लाने पर उसे भर्ती कर दिया। पहली बार भर्ती करने से मना करने के आधार पर जिम्स निदेशक संबंधित आरोपी अफसर-कर्मी पर कार्रवाई करेंगे।