सुरक्षा व्यवस्था में सबसे अहम कड़ी निभाने वाली पीसीआर का पेट्रोल मुसीबत के वक्त खत्म हो जाए तो क्या कहेंगे।
शुक्रवार देर रात एक ऐसा ही वाकया सामने आया, जब एक घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के लिए पीसीआर बुलाई गई, लेकिन उसमें तैनात पुलिसवाले ने साफ कह दिया कि गाड़ी में पेट्रोल नहीं है और जेब से पेट्रोल नहीं भरवा सकते। हाईटेक शहर की चौकस पुलिस से इस जवाब की उम्मीद तो नहीं की जा सकती।
दरअसल, सूरजपुर घंटा घर के पास एक व्यक्ति अज्ञात वाहन की चपेट में आकर घायल हो गया। घायल को परिजन सचिन किसी तरह एक्सप्रेसवे के पास एक निजी अस्पताल में ले गए।
'कोटा पूरा है, जिप्सी में तेल नहीं है'
पहले तो अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती करने से मना कर दिया, लेकिन जब परिजन ने अमर उजाला में इस संबंध में शिकायत की और अस्पताल प्रबंधन को मामला मीडिया में जाने का पता चला तो उन्होंने घायल को भर्ती कर लिया। लेकिन, बाद में पुलिस केस बताते हुए सरकारी अस्पताल ले जाने की बात कही।
सचिन ने 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी और कहा कि घायल को अस्पताल ले जाना है। सचिन ने बताया कि एक पीसीआर पहुंची, लेकिन उसमें तैनात पुलिस ने कहा कि जिप्सी में पेट्रोल ही नहीं है। पुलिस वालों ने बताया कि उन्हें हर माह 150 लीटर तेल मिलता है, वह कोटा पूरा हो चुका है।
अपनी जेब से तेल नहीं डलवाया जा सकता। इसके बाद सचिन ने घायल को दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
100 नंबर में '100' फसाद
आए दिन इस तरह की शिकायतें मिलती हैं कि 100 कॉल करने पर गाजियाबाद या दिल्ली पुलिस के पास पहुंच जाती है। एक और शिकायत है कि अगर कॉल मिल गई तो कंट्रोल रूम में तैनात पुलिस कहती है कि पीसीआर का नंबर लिखो और कॉल करो। पूरी प्रकिया में इतना वक्त गुजर जाता है कि घटना के बाद अपराधी को भागने का मौका मिल जाता है।
एसपी सिटी योगेश सिंह पीड़ित ने 100 नंबर पर फोन किया था, पहले वहां 19 नंबर पीसीआर पहुंची। उसका क्षेत्र न होने के चलते 38 नंबर पीसीआर गई। पीसीआर में पेट्रोल खत्म होने की जांच कराई जाएगी। बात अगर सही पाई जाएगी तो संबंधित पुलिस वालों पर कार्रवाई होगी।