व्यापारियों ने शनिवार सुबह मौन जुलूस निकाला और थाना परिसर में भी गए, लेकिन इतनी भीड़ देखकर अधिकारियों के चेहरे पीले पड़ गए। लेकिन चंद ही मिनट में मामला शांत हो गया।
दरअसल, दनकौर में पूर्व प्रबंधक हत्याकांड मामले में शनिवार की सुबह तक कस्बे का माहौल शांत हो गया था तो पुलिस अधिकारी भी थाने में बैठकर आराम फरमा रहे थे।
अचानक दनकौर के करीब डेढ़ हजार व्यापारियों की भीड़ थाने में घुस आई तो डीआईजी समेत अन्य अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए कि इतने लोग अचानक क्यो आ गए। लेकिन व्यापारियों द्वारा मौन जुलुस निकाला गया था।
व्यापारी थाने के मेन गेट से प्रवेश करके पीछे वाले गेट से शांतिपूर्वक निकल गए। इसके बाद ही अधिकारियों की सांस में सांस आई।
व्यापारियों का कहना है कि पुलिस को उनकी अक्षमता का अहसास दिलाने के लिए थाने से मौन जुलुस निकाला गया था। जिससे उन्हें कुछ शर्म आए और अपराध पर लगाम लगा सके और बदमाशों की गिरफ्तारी कर सके। लेकिन पुलिस अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और वह थाने में ही जमे रहे।
भीड़ से जान बचाकर भागी पुलिस
शुक्रवार रात को पूर्व प्रबंधक हत्याकांड के बाद गुस्साई भीड़ थाने में घुस आई। व्यापारियों ने बाहर खड़ी दो पीसीआर समेत करीब आठ वाहनों को आग के हवाले कर दिया और थानाप्रभारी के दफ्तर को भी आग लगाने का प्रयास किया। लेकिन आग बाहरी खिड़कियों तक ही सीमित रह गई। थाने में मौजूद तीन सिपाहियों ने थाने का चैनल अंदर से बंद कर दिया। जिससे थाने के अंदर का रिकार्ड और हथियार नष्ट होने से बच गए। जबकि जो कर्मचारी बाहर थे वह दीवारों को फांदकर भागे ओर जान बचाई। व्यापारियों ने देखा कि एक सीओ भी वहां पर मौजूद थे, जिससे व्यापारी नाराज थे। सीओ को देखकर व्यापारी उसके पीछे भागे तो वह भी दीवार फांदकर भागे।