यह कागज रजिस्ट्रार के यहां दिए गए जो कंपनी को अपने नाम हस्तांतरित करने के लिए थे। सुनील ने रजिस्ट्री ऑफिस में मां के जीवित होने का शपथ पत्र दिया। जबकि मां की मौत शपथ पत्र देने के सात दिन पहले ही हो गई थी। जिन दो गवाहों के शपथ पत्र पर हस्ताक्षर हैं, वे भी अंतिम संस्कार में शामिल थे।
कुछ दिन बाद ही सुनील ने कंपनी के 29 करोड़ रुपये दोस्त की कंपनी को ट्रांसफर कर दिए। जब इस फर्जीवाड़े की जानकारी विजय गुप्ता को हुई तो उन्होंने विरोध किया। इस पर सुनील ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।
कोतवाली सेक्टर-20 के प्रभारी निरीक्षक मनोज पंत ने बताया कि मामले की प्राथमिक जांच में पता चला है कि वादी को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं, मां के जीवित होने का गलत शपथ पत्र भी दिया गया है। इस मामले में नवी मुंबई निवासी सुनील गुप्ता, उसकी पत्नी राधा गुप्ता और बेटे अभिषेक गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है।