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नोएडा है देश का सबसे प्रदूषित शहर

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कानपुर और लखनऊ के बाद देश का सबसे प्रदूषित शहर उत्तर प्रदेश की शो विंडो कहे जाने वाला नोएडा हो गया है। मंगलवार को यहां का पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) का स्तर 450 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर को पार कर गया।
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प्रदूषित शहरों में एनसीआर के चार इलाके शामिल रहे। नोएडा के बाद दूसरे नंबर पर हरियाणा का फरीदाबाद रहा। इस सूची में दिल्ली एयरपोर्ट व मथुरा रोड भी शामिल रहा। वहीं देश के छह शहरों के वातावरण में प्रदूषकों की मात्रा खतरनाक स्तर पर पाई गई।

सात शहरों में पीएम का स्तर 400 से ऊपर था। दरअसल, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) रोजाना देश के प्रमुख शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स जारी करता है।
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400 का मानक बहुत खराब माना जाता है

इसका मानक है कि प्रदूषण का स्तर 0-50 के बीच होने पर आबोहवा अच्छी मानी जाती है, जबकि 51-100 के बीच संतोषजनक। 101-300 तक खराब और 400 का मानक बहुत खराब माना जाता है।

वहीं प्रदूषकों का स्तर 401 के पार होने पर हालात खतरनाक हो जाते हैं। मंगलवार को इस पैमाने पर देश का सबसे प्रदूषित शहर नोएडा रहा।

सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्ट व रिसर्च (सफर) के मॉनीटरिंग स्टेशन की आंकड़ों के मुताबिक महीन धूल के कण (पीएम 2.5) का स्तर 472 तक, जबकि पीएम 10 भी करीब 450 पहुंच गया था।
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एनसीआर में पांचों जगहों पर प्रदूषण की मात्रा खतरनाक स्तर पर थी

सीपीसीबी के आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषित शहरों में दूसरे नंबर पर फरीदाबाद व तीसरे नंबर पर मुजफ्फरपुर (बिहार) रहा। इसके बाद दिल्ली के दो इलाके रहे। पांचों जगहों पर प्रदूषण की मात्रा खतरनाक स्तर पर थी।

वहीं, सफर के आंकड़े बताते हैं कि पिछले हफ्ते आबोहवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ था, लेकिन इस सप्ताह हालात दोबारा बदतर हो रहे हैं। सफर का पूर्वानुमान है कि अगले तीन दिनों तक दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा में सुधार होने की गुंजाइश नहीं है। शुक्रवार तक हालात कमोवेश ऐसे ही बने रहेंगे।

सीपीसीबी का मानना है कि आबोहवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंचने से लोगों पर इसका बुरा असर पड़ता है। खास तौर से सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों की सेहत बिगड़ सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस मौसम में लोगों को बाहर निकलने से बचना चाहिए।
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