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नोएडा-ग्रेनो के कूड़े से बनेगी बिजली

Fri, 03 Apr 2015 12:24 AM IST
संदीप वर्मा/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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ग्रेटर नोएडा के प्राधिकरण ने घरों से निकलने वाले कूडे़ से बिजली बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। प्रतिदिन दोनों शहरों के करीब 500 टन कूड़े के निस्तारण की योजना चल रही है। आवेदन करने वाली कंपनी का शोलापुर में 400 टन का प्लांट है। ग्रेटर नोएडा के एसीईओ 7-8 अप्रैल के दौरान शोलापुर में प्लांट का निरीक्षण करेंगे।
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नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से दनकौर स्थित अस्तौली गांव में म्यूनिसपल सॉलिड वेस्ट बॉयोथानेशन (एमएसडब्ल्यू) प्लांट लगाने की योजना है। अभी तक यह कूड़ा दिल्ली स्थित प्लांट में जाता था। पीपीपी मॉडल पर यह प्लांट जिले में ही लगाने की योजना है। इसमें जमीन प्राधिकरण मुहैया कराएगा। कंपनी को कूड़े से बनने वाली बिजली, खाद, रिड्यूस्ड डिवाइडेड फ्यूल (कोयले की तरह उपयोग में आने वाला ईंधन) बेचने का अधिकार होगा।

महाराष्ट्र के शोलापुर में प्लांट लगाने वाली कंपनी ऑरगेनिक रिसाइक्लिंग सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड की ओर से प्रस्ताव दिया गया है। टेंडर अवार्ड होने के बाद से करीब 18 से 24 माह में यह प्लांट शुरू किया जा सकेगा।
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पांच मेगावाट बनेगी बिजली
शोलापुर में करीब चार सौ टन कूड़े से चार मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। वहीं, जिले में बनने वाले पांच सौ टन कूड़ा निस्तारण प्लांट से पांच मेगावाट बिजली बनाई जा सकेगी। इनमें एक मेगावाट बिजली प्लांट के उपयोग में आएगी।

-- 500 टन कूड़ा निस्तारण से प्रतिदिन क्या बनेगा--
- पांच मेगावाट बिजली
- 100 टन खाद
- 100 टन आरडीएफ (कोयले की तरह उपयोग में आने वाला ईंधन)

10 से 12 एकड़ में बनेगा प्लांट
प्लांट के लिए करीब दस से बारह एकड़ की जरूरत पड़ेगी। जबकि कूड़ा डालने के लिए अनुमान है कि 50 एकड़ तक जमीन की आवश्यकता है। इसे बनाने के लिए करीब 110 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जो कंपनी वहन करेगी। 25 साल के पीपीपी मॉडल पर इसकी वैधता होगी। वहीं, कंपनी के मार्केटिंग हेड रोहित अग्रवाल ने बताया कि इस प्लांट में बायो गैस भी बनाई जा सकती है।  

पर्यावरण के लिए बेहतर है तकनीक
कंपनी की ओर से दावा किया गया है कि कूड़ा निस्तारण के लिए अन्य तकनीक की अपेक्षा प्लांट में कूड़े को दबाकर उससे गैस निकलती है और बिजली बनाई जाती है। इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है। यूरोप, अमेरिका, कनाडा आदि देशों में इसी तरह की तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

नोएडा का 350 और ग्रेनो का 150 टन
ग्रेटर नोएडा से प्रतिदिन करीब डेढ़ सौ टन घरेलू कूड़ा निकलता है। वहीं, नोएडा से करीब 350 टन घरेलू कूड़ा निकलता है। इसके लिए 500 टन कूड़ा निस्तारण का प्लांट बनेगा।
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