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ग्रेटर नोएडा गैंगरेप: पुलिस को है एक खास गैंग पर शक

Wed, 31 May 2017 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

सार

वारदात के ढंग से पुख्ता हुआ शक, पीड़ितों ने दी थी कम उम्र के दरिंदे होने की जानकारी       
जेपी शर्मा       
ग्रेटर नोएडा। 
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तीन जनपद की स्पेशल टीम और एसटीएफ के अथक प्रयास के बावजूद जेवर हाईवे पर हैवानियत मामले में पुलिस को ठोस सबूत नहीं मिले हैं। इससे पुलिस का शक अब घुमंतू जाति के एक्सल, बावरिया, कच्छा बनियान, काछी, पवेरा, कबूतरा, गांधरा आदि गिरोह में शामिल हुए नए गुर्गों पर बढ़ गया है।
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वारदात के ढंग और बदमाशों की आयु पुलिस के इस शक को पुख्ता कर रही है। ये नए गुर्गे यूं तो घुमंतू गैंग के पारंपरिक तौर तरीके से ही वारदात करते हैं, लेकिन ये समय के साथ कुछ बदलाव करने लगे हैं।

इसके अंतर्गत यह किसी स्थानीय या काफी दिनों से रह रहे किसी शातिर को वारदात में शामिल करने लगे हैं। इसके चलते पुलिस घुमंतू गिरोह के नए गुर्गों को तलाशने में जुट गई है।
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दरअसल, कई दशक से एनसीआर क्षेत्र में घुमंतू गिरोह पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

ये यूं तो राजस्थान के भरतपुर की जनजाति से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन ये एनसीआर व पूर्व उत्तर प्रदेश आदि में रहकर वारदात करते हैं। इनके अपराध करने का तरीका हैवानियत भरा होता है। ये बेरहमी से मारपीट, लूटपाट करने के साथ महिलाओं की आबरू लूटने और लोगों की जान लेने में जरा भी नहीं हिचकिचाते।
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कार का तकनीकी परीक्षण कराया

- फोटो : अमर उजाला
पहले ये गिरोह लाठी-डंडे, रस्सी और सरियों का इस्तेमाल करते थेे, लेकिन अब यह पिस्टल-तमंचे का भी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, गिरोह के कुछ सदस्य आज भी लाठी-डंडे व सरियों पर ही भरोसा जताते हैं, ताकि वारदात के बाद ये आसानी से जंगल, नदी व रजवाहे में इन्हें फेंक सकें।

वारदात के समय ये अपने वाहन, मोबाइल आदि का इस्तेमाल नहीं करते। नए सदस्य अब कच्छा बनियान की जगह जींस-टीशर्ट या जींस बनियान का इस्तेमाल करते हैं। इस वारदात में भी पीड़ितों ने दरिंदों के इसी तरह के कपड़े व हथियार होना बताया था।

इसके चलते पुलिस की विशेष टीम घुमंतू गिरोह के नए गुर्गों की तलाश व धरपकड़ में जुट गई हैं। इसके लिए टीम ने मेवात व भरतपुर तक खाक छानी है।

जेवर कांड में चौंकाने वाली बात यह रही है कि कार के दो टायरों के नीचे वस्तु फेंकने के बाद पंचर हुआ। किसी लोहे की वस्तु को फेंककर पंचर करना ये पुलिस के लिए जांच का विषय बना हुआ है। इसके लिए कार का तकनीकी परीक्षण भी कराया गया है।
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