तीन जनपद की स्पेशल टीम और एसटीएफ के अथक प्रयास के बावजूद जेवर हाईवे पर हैवानियत मामले में पुलिस को ठोस सबूत नहीं मिले हैं। इससे पुलिस का शक अब घुमंतू जाति के एक्सल, बावरिया, कच्छा बनियान, काछी, पवेरा, कबूतरा, गांधरा आदि गिरोह में शामिल हुए नए गुर्गों पर बढ़ गया है।
वारदात के ढंग और बदमाशों की आयु पुलिस के इस शक को पुख्ता कर रही है। ये नए गुर्गे यूं तो घुमंतू गैंग के पारंपरिक तौर तरीके से ही वारदात करते हैं, लेकिन ये समय के साथ कुछ बदलाव करने लगे हैं।
इसके अंतर्गत यह किसी स्थानीय या काफी दिनों से रह रहे किसी शातिर को वारदात में शामिल करने लगे हैं। इसके चलते पुलिस घुमंतू गिरोह के नए गुर्गों को तलाशने में जुट गई है।
दरअसल, कई दशक से एनसीआर क्षेत्र में घुमंतू गिरोह पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
ये यूं तो राजस्थान के भरतपुर की जनजाति से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन ये एनसीआर व पूर्व उत्तर प्रदेश आदि में रहकर वारदात करते हैं। इनके अपराध करने का तरीका हैवानियत भरा होता है। ये बेरहमी से मारपीट, लूटपाट करने के साथ महिलाओं की आबरू लूटने और लोगों की जान लेने में जरा भी नहीं हिचकिचाते।